भीलवाड़ा। कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा पर राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबन्धन अकादमी, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित स्थानीय फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर उद्यमिता विकास विषय पर पाँच दिवसीय कौशल प्रशिक्षण का शुभारम्भ किया गया।
प्रशिक्षण के शुभारम्भ पर डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबन्धन अकादमी, हैदराबाद ने फल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण में सफाई पर जोर देते हुए बताया कि हमें काम में आने वाले उपकरणों, खाद्य सामग्री एवं हाथों के अच्छी तरह से साफ करके कार्य करना चाहिए। डॉ. गोपाल लाल ने वैज्ञानिक तरीके से ज्यूस एवं अचार बनाना, परिरक्षण करना, सुरक्षित भण्ड़ारण एवं विपणन के बारे में जानकारी देते हुए समूह में उद्यम स्थापित कर आमदनी बढ़ाने की आवश्यकता के साथ ही रसद विभाग से लाईसेन्स प्राप्त करने की प्रक्रिया बताई। डॉ. गोपाल लाल ने मोटे अनाजों से विभिन्न व्यंजन बनाकर दैनिक आहार में शामिल करने के बारे में भी बताया।
डॉ. एम. बालाकृष्णन, प्रमुख वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष (एससीएसपी योजना) राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबन्धन अकादमी, हैदराबाद ने प्रशिक्षण के उपरान्त स्वयं का उद्यम स्थापित करने हेतु अनुकूल जगह का चयन करना, आवश्यक उपकरणों की आवश्यकता एवं प्रसंस्करण से पूर्व रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। डॉ. बालाकृष्णन ने राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबन्धन अकादमी, हैदराबाद के प्रमुख उद्देश्य एवं संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने केन्द्र की गतिविधियों से अवगत करवाते हुए बताया कि 27 जून तक चलने वाले प्रशिक्षण में अनुसूचित जाति की 30 ग्रामीण युवतियों को स्थानीय फल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन द्वारा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने हेतु जागरूक किया जायेगा।
डॉ. यादव ने तैयार उत्पाद का बाजार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण सुविधा की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा के पूर्व अधिष्ठाता एवं प्रमुख कीट वैज्ञानिक डॉ. किशन लाल जीनगर ने प्रसंस्करण से पूर्व फल एवं सब्जियों का चयन एवं गुणवत्ता की जाँच करने के साथ ही क्रय करने से पूर्व बाजार भाव का आंकलन करने की आवश्यकता जताई। तकनीकी सहायक अनिता यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि प्रशिक्षण में करेला, नाम गिलोय, पाईनेपल, चुकन्दर एवं मिक्स फल ज्यूस का प्रयोगिक प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता संजय बिश्नोई ने पंजीयन किया।