नंदराय (हलचल)। जिले के नंदराय कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं का अपनी मांग को लेकर जारी आंदोलन आज तीसरे दिन और उग्र हो गया। शिक्षक के तबादले के विरोध में शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब प्रशासन की अनदेखी के चलते संघर्ष की नई राह पकड़ रहा है।
तीन दिन से 'विनय' और 'प्रतीक्षा', अब आक्रोश
आंदोलन की स्थिति को देखकर रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई— "विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति, बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति"— सटीक बैठती नजर आ रही है।
पहला दिन: छात्रों ने विनय के साथ अपनी मांग रखी।
दूसरा दिन: विभाग के किसी सकारात्मक कदम की प्रतीक्षा की।
तीसरा दिन: किसी भी अधिकारी के न पहुंचने से अब छात्रों का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
क्यों आक्रोशित हैं छात्र?
विद्यालय में कार्यरत भूगोल व्याख्याता शंकरलाल जाट का हाल ही में तबादला कर दिया गया है। छात्र-छात्राएं इस तबादले से खासे आहत हैं और अपने पसंदीदा शिक्षक को पुनः विद्यालय में नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सत्र के बीच में शिक्षक का जाना उनकी पढ़ाई को प्रभावित करेगा।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा तनाव
हैरानी की बात यह है कि तीन दिन से छात्र स्कूल के गेट पर डटे हुए हैं, लेकिन शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अभी तक मौके पर नहीं पहुंचा है। विभाग की ओर से कोई आश्वासन न मिलने के कारण अब छात्रों के साथ-साथ ग्रामीणों में भी रोष व्याप्त है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिक्षक शंकरलाल जाट का तबादला निरस्त नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भीलवाड़ा हलचल के लिए नंदराय से रिपोर्ट
