भीलवाड़ा के आसमान में सजे 'रंग-बिरंगे सितारे': कटी है... वो मारा... के शोर के बीच परवान चढ़ी पतंगबाजी, मंदिरों में सजी झांकियां

Update: 2026-01-14 17:30 GMT


भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में मकर संक्रांति का पर्व बुधवार को हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। दान-पुण्य के साथ-साथ शहर के आसमान में सुबह से ही पतंगों का कब्जा रहा। अनुकूल मौसम और हल्की हवाओं ने पतंगबाजों का उत्साह दोगुना कर दिया, जिससे छतों पर दिनभर पेंच लड़ाने का दौर चलता रहा।

मंदिरों में सजे 'पतंगों वाले सरकार'

संक्रांति के अवसर पर शहर के प्रमुख आराध्य देवों के दरबार में भी पतंगों का अनूठा श्रृंगार देखने को मिला:संकट मोचन हनुमान मंदिर: यहाँ बाबा हनुमान के समक्ष आकर्षक पतंगों की झांकी सजाई गई।पेंच के बालाजी व हठीले हनुमान: इन मंदिरों में भी विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।कोटड़ी चारभुजा नाथ: भगवान चारभुजा नाथ के दरबार में भी पतंगों का विशेष सजावट की गई, जो आकर्षण का केंद्र रही।

दान-पुण्य की रही सरिता

श्रद्धालुओं ने सुबह पवित्र स्नान के बाद मंदिरों और गौशालाओं में जमकर दान-पुण्य किया। तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, घी और ऊनी वस्त्रों का दान कर पुण्य लाभ कमाया। शहर के प्रमुख चौराहों पर गायों को हरा चारा खिलाने के लिए भी लोगों की भीड़ जुटी रही।

पतंगबाजी ने लिया 'सोशल' रूप, पारंपरिक खेल पड़े फीके

शहर की छतों पर 'वो काटा' और 'लपेट' के शोर के बीच डीजे की धुनों पर युवा थिरकते नजर आए। हालांकि, समय के साथ उत्सव मनाने के तरीके भी बदले हैं:अनुकूल मौसम: पतंगबाजी के लिए हवा और धूप का मेल बिल्कुल सही रहा।

ओझल होते पारंपरिक खेल: इस बार शहर की गलियों में पारंपरिक खेल जैसे गिल्ली-डंडा और सितोलिया खेलते लोग बहुत कम नजर आए। क्रिकेट और पतंगबाजी के शोर में बचपन के ये पुराने खेल अब सीमित होते जा रहे हैं।


 



पर्व, परंपरा और आपके शहर की हर हलचल के लिए जुड़े रहें 'भीलवाड़ा हलचल' के साथ।

Similar News