पतंग का धागा बेचो, मौत नहीं! भीलवाड़ा की गलियों में खुलेआम बिक रही 'खूनी डोर
भीलवाड़ा हलचल। हर शहर, हर गली और हर मोहल्ले में जब बच्चे और किशोर पतंग उड़ाने निकलते हैं, तो उनका उद्देश्य केवल आसमान छूना होता है। लेकिन दुर्भाग्य से, पतंग की यह उड़ान अब कई बार किसी की जान लेकर ही थमती है। इसका कारण कोई आम धागा नहीं, बल्कि एक जानलेवा उत्पाद है— चाइनीज मांझा।
दुकानों के पीछे 'गोदामों' में मौत का कारोबार
शहर के बाजारों में प्रशासन की सख्ती से बचने के लिए अब नया रास्ता निकाला गया है। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानों पर चाइनीज मांझा नहीं रख रहे, बल्कि दुकानों के पास गोदामों, पड़ोस के मकानों या रिहायशी इलाकों (लेबर कॉलोनी, शास्त्रीनगर, बापूनगर, सांगानेरी गेट) में छिपाकर इसे बेच रहे हैं। मामूली मुनाफे के लिए दुकानदार उन हादसों को न्योता दे रहे हैं, जो किसी भी घर का चिराग बुझा सकते हैं।
जागरूक नागरिक देवकिशन प्रजापत कहते हैं— "दुकानदार भूल रहे हैं कि जिस खूनी डोर को वे बेच रहे हैं, कल उनका ही कोई अपना इसका शिकार हो सकता है।"
क्यों इतना खतरनाक है यह मांझा?
यह महज एक धागा नहीं, बल्कि नायलॉन, प्लास्टिक और धातु के महीन रेशों से बना एक घातक हथियार है। इसकी खासियतें ही इसकी सबसे बड़ी बुराइयां हैं:
अदृश्य तलवार: यह हवा में लहराता हुआ आसानी से दिखाई नहीं देता, जिससे राहगीर संभल भी नहीं पाते।
अटूट और धारदार: यह न टूटता है, न गलता है। इसमें शीशे जैसी तीखी धार होती है, जो गले की नसों को पल भर में काट देती है।
गहरे घाव: बाइक सवारों के लिए यह पारदर्शी मौत है। जब यह किसी के चेहरे या गर्दन से टकराता है, तो किसी धारदार हथियार की तरह त्वचा को चीर देता है।
बेजुबान परिंदों और मासूमों का दुश्मन
हर दिन अखबारों की सुर्खियां मांझे से कटी गर्दनों और तड़पते पक्षियों की कहानियों से भरी होती हैं। कोई स्कूली बच्चा घायल हो रहा है, तो कोई बाइक सवार अचानक सड़क पर गिर रहा है। आसमान में उड़ने वाले परिंदे अपने पंख कटवाकर ज़मीन पर दम तोड़ रहे हैं। यह सब हमारी आँखों के सामने हो रहा है। पीपुल्स फॉर एनिमल्स के बाबूलाल जाजू ने इस जानलेवा मांजा पर तत्काल प्रभाव से रो लगाने की मांग की।
मौन स्वीकृति या लापरवाही?
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्रतिबंध के बावजूद सड़कों के किनारे और बाजारों में यह जहर खुलेआम बिक रहा है। प्रशासन की चुप्पी इस मांझे जितनी ही धारदार और खतरनाक है। कानून कागजों में दर्ज है, लेकिन जमीनी स्तर पर न कोई बड़ी कार्रवाई हो रही है, न ही सख्ती। यह मौन स्वीकृति उन गलत व्यापारियों के हौसले बुलंद कर रही है जो लोगों के खून से अपनी जेबें भर रहे हैं।
चेतावनी: अगर आज हम और प्रशासन नहीं जागे, तो कल सड़क पर अगला शिकार कोई भी हो सकता है। पतंग उड़ाएं, लेकिन 'खूनी डोर' का बहिष्कार करें। सूती डोर अपनाएं, जान बचाएं।
नोट: इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें ताकि प्रशासन की नींद टूटे और भीलवाड़ा की सड़कें सुरक्षित हो सकें।
बने रहें "भीलवाड़ा हलचल" के साथ।
