विधानसभा के शून्यकाल में गूंजा बजरी संकट, विधायक अशोक कोठारी ने सस्ती व सुलभ आपूर्ति की उठाई मांग
भीलवाड़ा। राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने प्रदेश में बजरी की बढ़ती कीमतों, अवैध खनन और उससे बिगड़ती कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की निरंतरता आवश्यक है, लेकिन बजरी की कमी और महंगाई के कारण आमजन, निर्माणकर्ता और छोटे ठेकेदार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
विधायक कोठारी ने कहा कि एम सैंड पॉलिसी बेहतर होने के बावजूद सभी निर्माण कार्यों में इसका उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने से बजरी के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे कालाबाजारी और अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। इसके चलते अपराध बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बजरी नीति 2024 के तहत 50 से 100 हेक्टेयर के छोटे क्षेत्रों में 255 बजरी लीज की पारदर्शी नीलामी की गई थी। डीएसआर रिपोर्ट के आधार पर भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर और अजमेर जिलों में वर्ष 2024 में 93 बजरी लीज का ऑक्शन हुआ, जिनमें अकेले भीलवाड़ा जिले की 49 लीज शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य था कि आमजन को 250 से 300 रुपये प्रति टन की दर से बजरी उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन वर्तमान में यही बजरी 1000 से 1500 रुपये प्रति टन तक बिक रही है।
कोठारी ने सुप्रीम कोर्ट के सिविल रिट याचिका 3661 2020 पवन कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन जरूरी है, लेकिन कानूनी खनन पर पूर्ण प्रतिबंध से अवैध खनन और रेत माफियाओं को बढ़ावा मिलता है, जिससे अपराध, जानमाल का खतरा और सरकारी राजस्व को नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उच्च न्यायालय द्वारा सीएसी रिपोर्ट की एक शर्त के आधार पर कई लीज निरस्त कर दी गई हैं, जबकि वह शर्त खनन संचालन से संबंधित है। इसके चलते अवैध बजरी पर रोक लगाने के लिए माइनिंग इंजीनियरों और पुलिस बल को अन्य कार्य छोड़कर लगाना पड़ रहा है। साथ ही बेरोजगार युवा इस अवैध गतिविधि में जुड़कर अपना भविष्य खराब कर रहे हैं।
विधायक कोठारी ने सरकार से मांग की कि बजरी को पूर्णतया निःशुल्क कर इसका अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपा जाए ताकि तय मापदंडों के अनुसार खनन हो और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगे। उन्होंने पूर्व व्यवस्था के अनुसार कांटों से आमजन को बजरी उपलब्ध कराने, निरस्त की गई सभी बजरी लीजों को नीति के अनुसार पुनः चालू करने तथा शीघ्र निर्णय लेने की मांग भी रखी।
उन्होंने बताया कि निरस्त लीजों से सरकार को 117 करोड़ रुपये का प्रीमियम प्राप्त हुआ था और यह नीति जनहितैषी है, इसलिए इसे उच्च स्तर पर पुनः बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही चंबल डेम से गाद निकालने के लिए अधिकृत कंपनी द्वारा निर्धारित क्षेत्र से बाहर कार्य करने का मुद्दा उठाते हुए उसके कार्यक्षेत्र की जांच और सीमांकन कराने की मांग भी की।
विधायक कोठारी ने चेताया कि यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिए गए तो अवैध खनन, अपराध और महंगाई की समस्या और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर आमजन को राहत देने की अपील की।
