सवाईपुर क्षेत्र में कुदरत का कहर: नींबू के आकार के गिरे ओले, पककर तैयार फसलों पर फिरा पानी
सवाईपुर (सांवर वैष्णव)। सवाईपुर कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि अन्नदाता के अरमानों पर पानी फिर गया। दोपहर बाद बदले मौसम के मिजाज ने शाम होते-होते तबाही का मंजर पेश किया। क्षेत्र के कई गांवों में भारी ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है।
कहीं बेर तो कहीं नींबू के आकार के गिरे ओले
शाम को अचानक चली तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश ने देखते ही देखते ओलावृष्टि का रूप ले लिया। भाकलिया, गेंदलिया, बड़ला, चावंडिया और रूपाहेली गांवों में कुदरत का कहर बरपा। यहाँ कहीं छोटे बेर के आकार के तो कहीं 100 से 200 ग्राम वजनी (नींबू के आकार के) ओले गिरे। ओलों की सफेद चादर ने खेतों को ढक दिया, जिससे हर तरफ बर्बादी का मंजर नजर आने लगा।
4 महीने की मेहनत मिट्टी में मिली
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में गेहूं, जौ और चने की फसलें पककर पूरी तरह तैयार खड़ी थीं या कटकर रखी हुई थीं। किसानों का कहना है कि अगर 10-15 दिन मौसम साफ रहता तो फसल और पशुओं के चारे की व्यवस्था हो जाती, लेकिन इस आपदा ने 4 महीने की खून-पसीने की मेहनत पर पानी फेर दिया। भाकलिया और गेंदलिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आ रही हैं।
खेतों में बिछ गई फसलें
तेज हवा और भारी ओलों की चोट से फसलें खेतों में बिछ गई हैं। पक चुकी बालियों से दाने झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। अब किसानों की नजरें सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हैं कि उन्हें इस भारी नुकसान का उचित मुआवजा मिल सके।
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