भीलवाड़ा समेत 8 शहरों के रोडवेज बस स्टैंड चमकेंगे, पीपीपी मॉडल पर होगा विकास; एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी
भीलवाड़ा। राजस्थान में अब बस स्टैंड्स की पुरानी सूरत बदलने वाली है। उदयपुर समेत 8 प्रमुख शहरों के बस अड्डों को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। जयपुर मुख्यालय से रुचि अभिव्यक्ति (EOI) मंगाई गई थी, जिसमें 9 बड़े डेवलपर्स ने अपने प्रपोजल जमा किए। इन कंपनियों ने बस स्टैंड्स को आधुनिक बनाने के लिए अपने सुझाव भी सरकार को सौंपे हैं।
100 से 300 करोड़ खर्च होने का अनुमान
अधिकारियों के अनुसार, इस मेगा प्रोजेक्ट में 100 से 300 करोड़ रुपये तक का निवेश होने का अनुमान है। फिलहाल जयपुर में इन प्रपोजल्स पर विचार चल रहा है। एक कमेटी पहले बिडर्स की योग्यता चेक करेगी, फिर उनके आइडियाज पर विचार होगा। अगले हफ्ते फाइनल प्लान सरकार को भेजा जाएगा, और मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी होकर काम शुरू कर दिया जाएगा।
होटल, मॉल और ऑफिस भी बनेंगे
बस स्टैंडों का विकास इस तरह से किया जाएगा कि यात्रियों को एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलें। योजना के मुताबिक, बस स्टैंड के ग्राउंड फ्लोर का इस्तेमाल बसों के आने-जाने के लिए होगा। पहली मंजिल पर रोडवेज के ऑफिस बनाए जाएंगे। इसके ऊपर की मंजिलों पर होटल, मॉल, प्राइवेट ऑफिस और दुकानें खोली जा सकेंगी। इससे बस स्टैंड न केवल सुंदर दिखेंगे, बल्कि यात्रियों को खाने-पीने और ठहरने की हाईटेक सुविधाएं भी मिलेंगी।
किन शहरों में कितनी जमीन पर होगा काम?
इस योजना में उदयपुर के साथ-साथ चित्तौड़गढ़, बीकानेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर और बूंदी के बस स्टैंड शामिल हैं। नीचे दी गई जमीन पर विकास कार्य होगा। हर शहर के हिसाब से अलग क्षेत्र निर्धारित है।
भीलवाड़ा: 28,198 वर्गमीटर
उदयपुर: 16,788 वर्गमीटर
बीकानेर: 40,000 वर्गमीटर (सबसे ज्यादा!)
भरतपुर: 30,917 वर्गमीटर
चित्तौड़गढ़: 15,124 वर्गमीटर
अजमेर: 24,767 वर्गमीटर
ब्यावर: 24,404 वर्गमीटर
बूंदी: 20,982 वर्गमीटर
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि पीपीपी मॉडल से प्राइवेट कंपनियां निवेश करेंगी, जिससे काम तेजी से होगा। बस स्टैंडों पर अब यात्रियों के बैठने के लिए अच्छे वेटिंग हॉल, पार्किंग, डिजिटल सेवाएं और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट देखने को मिलेगा। साथ ही, रोडवेज मैनेजमेंट की सहमति से इन जगहों पर कमर्शियल एक्टिविटीज भी बढ़ेंगी, जिससे विभाग की कमाई भी होगी।
