राजस्थान में प्रदूषण पर लगाम: अब गुजरात की तर्ज पर होगी 'धुएं की ट्रेडिंग', कम प्रदूषण करने वाली फैक्ट्रियों को होगा मुनाफा

Update: 2026-02-14 18:31 GMT


 राजस्थान में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में अब गुजरात की तर्ज पर उत्सर्जन व्यापार योजना (Emission Trading Scheme - ETS) शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत उद्योग न केवल प्रदूषण कम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे, बल्कि वे अपने बचे हुए 'प्रदूषण कोटे' को बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा सकेंगे।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) अब केवल जुर्माना लगाने के बजाय बाज़ार आधारित इस व्यवस्था को लागू कर रहा है। इसके तहत उद्योगों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) पर पैनी नजर रखी जाएगी।

क्या है ETS और कैसे होगा फायदा?

कैप और परमिट: सरकार प्रदूषण की एक अधिकतम सीमा (कैप) तय करेगी और फैक्ट्रियों को सीमित परमिट दिए जाएंगे।

खरीद-बेच (ट्रेडिंग): यदि कोई फैक्ट्री तय सीमा से कम धुआं छोड़ती है, तो वह अपने बचे हुए परमिट उस फैक्ट्री को बेच सकेगी जिसने सीमा से अधिक प्रदूषण किया है।

प्रोत्साहन: पर्यावरण का ध्यान रखने वाली इकाइयों को नकद लाभ मिलेगा, जबकि ज्यादा प्रदूषण फैलाने वालों को अतिरिक्त परमिट खरीदने के लिए पैसे खर्च करने होंगे।

तैयारियां और अध्ययन:

अध्ययन जारी: इस योजना के लिए जे-पीएएल (J-PAL) दक्षिण एशिया और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के साथ 5 साल का एमओयू किया गया है।

रिपोर्ट: अध्ययन की अंतिम रिपोर्ट अप्रैल में आने की उम्मीद है।

चिह्नित उद्योग: मंडल ने सीमेंट, थर्मल पावर प्लांट और धातु गलाने जैसे 17 सेक्टर्स की 130 बड़ी इंडस्ट्रीज को इस योजना के पहले चरण के लिए चुना है।

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