शाहबाद के जंगलों में 1.19 लाख पेड़ों की कटाई पर गहराया विवाद, जाजू ने पीएम को लिखा पत्र

Update: 2026-03-14 06:17 GMT

भीलवाड़ा। कूनो नेशनल पार्क के समीप बारां जिले के शाहबाद में प्रस्तावित बिजली स्टोरेज प्लांट के लिए 1.19 लाख पेड़ों को काटने की तैयारियों ने तूल पकड़ लिया है। पीपुल फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी एवं विख्यात पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को ईमेल व पत्र भेजकर इस विनाशकारी प्रस्ताव को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

भ्रष्टाचार के आरोप और 'सुपरफास्ट' मंजूरी

जाजू ने निजी कंपनी 'ग्रीनको' के पम्प्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए 407 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों ने 'मोटे भ्रष्टाचार' के चलते बेहद अफरा-तफरी में इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भेजा है। जाजू ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 18 फरवरी को कंपनी ने रिपोर्ट दी और उसी दिन पैसा जमा करा दिया। इसके बाद मात्र 4 दिनों के भीतर (6 मार्च से 10 मार्च) राज्य सरकार की अनुशंसा होकर रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी गई। इतनी तेजी से हुई कार्रवाई अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बनाती है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर संकट

एक ओर जहां प्रधानमंत्री का 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर विशालकाय पेड़ों की इस बलि से पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ने का खतरा है। जाजू के अनुसार, यह क्षेत्र फर्स्ट शेड्यूल की दुर्लभ प्रजातियों और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। पेड़ों की कटाई से न केवल जलवायु संतुलन बिगड़ेगा, बल्कि वन्यजीवों के घर भी उजाड़ दिए जाएंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्लांट को किसी अन्य बंजर भूमि पर स्थापित किया जाना चाहिए।

डेढ़ साल से जारी है जन आंदोलन

गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट के विरोध में विठ्ठल सनाढ्य, ब्रिजेश विजयवर्गीय और प्रशांत पाटनी जैसे पर्यावरण प्रेमी पिछले डेढ़ साल से संघर्षरत हैं। पेड़ों को बचाने के लिए भीलवाड़ा से 5 हजार और राजस्थान भर से 51 हजार पोस्टकार्ड प्रधानमंत्री को भेजे जा चुके हैं, ताकि इस हरित क्षेत्र को बचाया जा सके।

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