सहकारी समिति कार्मिकों ने खोला मोर्चा: मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, महापड़ाव की चेतावनी

Update: 2026-03-23 07:00 GMT

भीलवाड़ा। प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कार्मिकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर स्पष्ट किया है कि यदि मार्च माह तक उनकी समस्याओं का सकारात्मक निराकरण नहीं हुआ, तो अप्रैल में जयपुर में विशाल रैली और महापड़ाव डाला जाएगा।

प्रमुख मांगें और लंबित प्रकरण

कार्मिकों ने ज्ञापन में मुख्य रूप से कैडर अथॉरिटी एवं नियोक्ता के निर्धारण की मांग दोहराई है। बताया गया है कि सहकारिता विभाग द्वारा गठित कमेटी ने सुझाव तो प्राप्त कर लिए हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से पत्रावलियाँ ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। इसके अलावा, ऋण पर्यवेक्षकों के पदों पर शत-प्रतिशत नियुक्ति व्यवस्थापकों के माध्यम से करने और आयु सीमा की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी की गई है।

नियमितीकरण से वंचित कार्मिकों में रोष

ज्ञापन के अनुसार, 10 जुलाई 2017 से पूर्व नियुक्त कई कार्मिक समय की कमी के चलते नियमितीकरण प्रक्रिया से वंचित रह गए थे। कार्मिकों ने मांग की है कि:

⇒ नियमितीकरण की प्रक्रिया को पुनः शुरू किया जाए।

⇒ व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक, सेल्समैन और कंप्यूटर ऑपरेटर सहित सभी श्रेणियों के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष के अनुसार संशोधित की जाए।

⇒ जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में बैंकिंग सहायक के 20 प्रतिशत आरक्षित कोटे पर भर्ती प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से प्रारंभ हो।

आंदोलन की राह पर कर्मचारी

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 27 फरवरी से लगातार कार्य बहिष्कार जारी है। यदि सरकार ने समय रहते सुध नहीं ली, तो अप्रैल में प्रदेशभर के कार्मिक जयपुर कूच करेंगे। इस बड़े आंदोलन की समस्त नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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