शक्करगढ़ क्षेत्र के बालापुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की भूमि पर वर्षों से चला आ रहा अतिक्रमण आखिरकार शनिवार को प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हटा दिया गया। विद्यालय भूमि पर कुछ दबंगों ने कब्जा कर उसे भैंसों का बाड़ा बना रखा था, जिसके कारण विद्यालय का विस्तार और नए भवन निर्माण में बाधा आ रही थी।
विद्यालय में दो कमरों में ही कक्षा 1 से 8 तक की आठ कक्षाएं संचालित हो रही थीं। बारिश के मौसम में कमरों की छत टपकने से बच्चों को बैठने तक में परेशानी होती थी। विद्यालय में 90 से अधिक छात्रों का नामांकन है, लेकिन निर्धारित भूमि पर कब्जे के कारण वर्षों से खेल मैदान से लेकर आवश्यक कमरे तक नहीं बन पाए।
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय आजादी के बाद से ही दो कमरों में संचालित हो रहा है। वर्ष 2009 में राज्य सरकार द्वारा इसे उच्च प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्नत कर दिया गया, लेकिन अतिक्रमण हटाए बिना भवन विस्तार संभव नहीं हो सका। ग्राम पंचायत द्वारा विद्यालय हेतु 8000 वर्ग फीट भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन सिर्फ 2000 वर्ग फीट पर ही भवन बना पाया गया। शेष 6000 वर्ग फीट पर दबंगों ने कब्जा कर भैंसों को बांधना शुरू कर दिया था साथ ही कच्चा मकान बना उसमें पशुओं का भूषा भर रखा था विद्यालय परिसर में चारदीवारी तक नहीं थी
कई बार विद्यालय प्रबंधन एवं ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अतिक्रमण हटाने की मांग उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में जिले में अन्य विद्यालयों से अतिक्रमण हटाए जाने के बाद भी बालापुरा विद्यालय की अनदेखी होती रही। ग्रामीणों ने बताया कि जमीन होने के बावजूद जिम्मेदार सिर्फ बजट और भूमि की कमी बताकर अपना पल्ला झाड़ते रहे।
शनिवार को तहसीलदार जहाजपुर रविकुमार मीना के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम गांव पहुंची और विद्यालय भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार बद्रीलाल मीना, पटवारी इस्लाम हुसैन, ग्राम विकास अधिकारी जीतराम चौधरी, हेड कांस्टेबल सियाराम मीना, पीईईओ रामेश्वर लाल मीना सहित ग्रामीण मौजूद रहे। कब्जे हटाने के बाद अधिकारियों ने भूमि का सीमांकन कराया और उसे विद्यालय प्रबंधन के सुपुर्द किया।
