भीलवाड़ा |कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा पर डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, उदयपुर तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित छः दिवसीय कृषक प्रशिक्षण राजस्थान के स्थानीय स्वादों को पर्यटन सम्पदा में परिवर्तित करना विषय पर आयोजित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को कृषि में नवीनतम तकनीकी अपनाने हेतु प्रेरित करना ताकि कृषि लागत में कमी की जा सके साथ ही स्वदेशी उद्यमिता को बढ़ावा देना एवं ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। डॉ. यादव ने एमएसएमई के तहत् पंजीयन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। डेयरी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, उदयपुर से डॉ. निकिता वधावन ने महाविद्यालय की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी देते हुए कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन द्वारा अधिक आमदनी अर्जित करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। साथ ही बताया कि राजस्थान के स्थानीय स्वादों गेहँू, बाजरा, दाल, बाटी, चूरमा, केर सांगरी को प्रामाणिक व्यंजनों और खान-पान के अनुभवों के माध्यम से पर्यटन सम्पदा में बदलकर राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना आवश्यक है। प्रशिक्षण में कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा के पूर्व डीन डॉ. किशन जीनगर, डॉ. सुचित्रा दाधीच, डॉ. ओ. पी. पारीक, अजित सिंह राठौड़, एफपीओ के निदेशक महावीर शर्मा, लालचन्द कुमावत ने व्यंजन आधारित पर्यटन, हैरिटेज होटलों में स्थानीय व्यंजन आदि के बारे में जानकारी से अवगत कराया। प्रशिक्षण में 25 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।