हरिशेवा धाम में काशी की तर्ज पर गंगा आरती, शहर की हवा में घुली भक्ति, ऊर्जा और चेतना

Update: 2026-02-22 14:54 GMT

भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी |हरिशेवा उदासीन सनातन मन्दिर में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के अंतर्गत प्रतिदिन हो रही काशी परंपरा की गंगा आरती ने शहर की शाम को आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया है। जैसे ही सूर्य अस्त होता है, वैसे ही आश्रम परिसर दीपों की पंक्तियों व विद्युतीकृत दीयों से जगमगा उठता है। शंखनाद, घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और लहराते धूपदीप के साथ जब काशी की तर्ज पर गंगा आरती प्रारंभ होती है, तो वातावरण में ऐसी दिव्यता उतरती है कि हर आने वाला श्रद्धालु स्वयं को गंगातट पर खड़ा महसूस करता है।

यह गंगा आरती अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन चुकी है। महोत्सव में देश दुनियां से भाग लेने पहुंचे श्रद्धालु मानते हैं कि इस आरती के दर्शन मात्र से मन की अशांति शांत होती है, तनाव दूर होता है और जीवन में आशा का संचार होता है।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने बताया कि गंगा आरती की संपूर्ण विधि पूर्ण वैदिक परंपरा के अनुसार की जा रही है। तीन सेवादार और तीन सहयोगी पंडित मिलकर यह सेवा संपन्न करते हैं। सबसे पहले शुद्ध जल, पुष्प, अक्षत और दीप से मां गंगा का आवाहन किया जाता है। इसके बाद शंखनाद के साथ गंगा स्तुति और वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है। दीपों की परिक्रमा, धूप अर्पण और आरती के दौरान उठती अग्निशिखाएं प्रतीक हैं, अज्ञान से ज्ञान की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। आरती समाप्त होते ही उपस्थित श्रद्धालु दीपों की लौ को नमन कर मनोकामना करते हैं और संकल्प लेते हैं कि वे अपने जीवन में भी पवित्रता और सेवा भाव को अपनाएंगे।

इस गंगा आरती का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह केवल व्यक्ति के मन को नहीं, बल्कि पूरे वातावरण को शुद्ध करती है। कहते है कि नियमित आरती से आश्रम परिसर ही नहीं, बल्कि भीलवाड़ा नगर की नकारात्मक ऊर्जा का क्षय हो रहा है।

महोत्सव में भाग ले रहे भक्तों का अनुभव है कि इससे मन को स्थिरता मिल रही है, क्रोध और निराशा कम हो रही है, परिवारों में शांति और सौहार्द बढ़ रहा है, युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति आकर्षण पैदा हो रहा है। यही कारण है कि आरती के समय शहर से बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे एक साथ हाथ जोड़कर खड़े दिखाई देते हैं। यह दृश्य अपने आप में सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

रविवार के आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी, महामंडलेश्वर शरणानंद, श्रीमहंत धर्मेंद्र दास, महंत लक्ष्मण दास त्यागी, महंत सुभाष शाह जम्मू, महंत दामोदर शरण हरिद्वार, महंत स्वरुपदास उदासीन अजमेर, महंत हनुमान राम उदासीन पुष्कर, महंत मोहन दास इंदौर, संत संतदास, महन्त रामदास रामायणी ट्रांसपोर्टनगर, महंत भूमानंद महाराज पंजाब, संत ओम दास, संत हंसदास रीवा, संत स्वरूप दास रीवा, संत संत मायाराम, संत गोविंदराम, संत प्रकाशानंद, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, कुनाल, सिद्धार्थ, मिहिर, पूर्व महापौर राकेश पाठक, पूर्व जिलाध्यक्ष लादूलाल तेली, सासंद प्रवक्ता विनोद झूरानी के साथ कई संत महात्मा शामिल थे। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंच रहे हैं, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक आकर्षण बनता जा रहा है।

महामंडलेश्वर का संदेशः नकारात्मकता का विसर्जन, सकारात्मकता का उदय---

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने कहा कि गंगा आरती संध्या की श्रेष्ठतम सेवा है। यह केवल दीप जलाने की क्रिया नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा के विसर्जन और सकारात्मक ऊर्जा के जागरण का माध्यम है। उन्होंने बताया कि विधिविधान से की गई यह आरती पूरे परिसर को शुद्ध करती है और भीलवाड़ा नगर के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। यही कारण है कि लोग इस आरती के दर्शन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।

विद्वानों का महासंगम, अनुष्ठानों से विश्व कल्याण की कामना--

सनातन मंगल महोत्सव के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के मार्गदर्शन में काशी, वृंदावन और वाराणसी सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों से 180 से अधिक विद्वान पधारे हैं। वृंदावन से आए पीठाचार्य श्रीराम कुमार मुद्गल के निर्देशन में श्री अष्टोत्तर शत (108) भागवत मूल पाठ का आयोजन हो रहा है। काशी के यज्ञाचार्य कामेश्वरनाथ तिवारी के सान्निध्य में यज्ञ संपादन एवं चारों वेदों के मूल पाठ का पारायण किया जा रहा है। इन अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि विश्व शांति, समाज कल्याण और सर्व मंगल की कामना है।

रासलीलाः भक्ति और कला का अनुपम संगम---

महोत्सव की शाम और भी दिव्य हो जाती हैं जब श्रीधाम वृंदावन के रसिकाचार्य कुंजबिहारी शर्मा के निर्देशन में निकुंज बिहारी रासलीला मंडल मंच पर उतरता है। प्रतिदिन शाम 7 बजे से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है बाल लीला, गोवर्धन धारण, रास और प्रेम लीला। यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा देता है भक्ति, करुणा, सेवा और प्रेम का संदेश।

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