साधना ओर संयम के मार्ग पर चलने से मानव जीवन सार्थक-सुकन मुनिजी

Update: 2026-02-22 14:50 GMT

भीलवाड़ा, । श्रमण सूर्य मरूधर केसरी मिश्रीमल म.सा. के सुशिष्य श्रमण संघीय वरिष्ठ प्रवर्तक सुकनमुनिजी म.सा. का 64वां दीक्षा दिवस रविवार को दो-दो सामायिक की आराधना के साथ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सुभाषनगर के तत्वावधान में मनाया गया। सुभाषनगर स्थानक में आयोजित कार्यक्रम में उपप्रवर्तिनी साध्वी मंजूलज्योतिजी म.सा. आदि ठाणा का सानिध्य भी प्राप्त होने से चतुर्विद संघ का समागम हो गया। समारोह में मुनिवृन्द,साध्वीगण एवं श्रावक श्राविकाओं ने पूज्य सुकनमुनिजी म.सा. के संयम जीवन की अनुमोदना करते हुए उनके दीर्घायु होकर जिनशासन की सेवा करते रहने की मंगलभावनाएं व्यक्त की। धर्मसभा में वरिष्ठ प्रवर्तक सुकनमुनिजी म.सा. ने कहा कि जीवात्मा के लिए मानव भव प्राप्त होना दुर्लभ होता है। धर्म की साधना ओर संयम के मार्ग पर चलकर ही इसे सार्थक किया जा सकता है। जीवन में त्याग ओर मर्यादाओं की पालना निरन्तर करते रहना चाहिए। उन्होंने भीलवाड़ावासियों की भक्ति व सेवा भावना की सराहना करते हुए उनके प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त की। तपस्वी रत्न उप प्रवर्तक अमृतमुनिजी म.सा. ने कहा कि धर्म उत्कृष्ट मंगल होता है। जहां धर्म होता है वहां कभी अमंगल हो ही नहीं सकता। ऐसे में जीवन में धर्म से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। जिनके जीवन में धर्म का स्थान नहीं होता वहां अमंगल प्रारंभ हो जाता है। जीवन में त्याग एवं मर्यादाएं होना आवश्यक है। इनके बिना हमारे कर्म निर्जरा नहीं हो सकती। उन्होंने पूज्य सुकनमुनिजी म.सा. के प्रति मंगल भाव व्यक्त करते हुए कहा कि वह मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. एवं लोकमान्य संत शेरे राजस्थान रूपचंदजी म.सा. की सेवा व भक्ति की परम्परा को निरन्तर आगे बढ़ा रहे है। जिनशासन की सेवा का अवसर भाग्य से ही प्राप्त होता है। डॉ. वरूण मुनि म.सा. ने जीवन में गुरू का महत्व समझाते हुए कहा कि गुरू के बिना गोविन्द यानि परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। जिनके जीवन में सद्गुरू की प्राप्ति हो जाती है उनका जीवन संवर जाता है। उन्होंने कहा कि हम गुरू को तो मानते है लेकिन उनके वचनों को नहीं मानते। गुरू के वचनों को जीवन में अंगीकार कर ले तो हमारा जीवन सार्थक हो सकता। युवा प्रणेता महेश मुनिजी म.सा. ने पूज्य प्रवर्तक सुकनमुनिजी के दीक्षा दिवस पर अभिनंदन करते हुए काव्य रचना प्रस्तुत की। युवा प्रेरिका साधिका रत्ना वसुधाजी म.सा. ने पूज्य प्रवर्तक सुकनमुनिजी म.सा. के दीक्षा दिवस पर उनके संयम जीवन की अनुमोदना करते हुए कहा कि ऐसे संतों का आशीर्वाद सदा संघ समाज को प्राप्त होता रहे ओर उनके बताए मार्ग पर चल हम अपना जीवन सार्थक कर सके। धर्मसभा में बालयोगी अखिलेश मुनि का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी ने दीक्षा दिवस पर अनुमोदना करते हुए गीत प्रस्तुत किया। शांतिभवन श्रीसंघ के मंत्री नवरतनमल भलावत ने आगामी होली चातुर्मास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सभी से अधिकाधिक धर्म लाभ प्राप्त करने का अनुरोध किया। जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान शाखा के प्रान्तीय अध्यक्ष आनंद चपलोत ने भी पूज्य सुकनमुनिजी म.सा. के दीक्षा दिवस पर अनुमोदना करते हुए मंगलभावनाएं व्यक्त की। सुभाषनगर महिला मण्डल की सदस्यों ने गीतिका की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शांतिभवन श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र चीपड़, अहिंसा भवन श्रीसंघ शास्त्रीनगर के अध्यक्ष अजय सांड, अरिहन्त विकास समिति चन्द्रशेखर आजादनगर के अध्यक्ष राजेन्द्र सुकलेचा, बापूनगर श्रीसंघ के मंत्री अनिल विश्लोत, वरिष्ठ सुश्रावक कंवरलाल सूरिया, सुशील चपलोत, दिनेश बम्ब आदि भी मौजूद थे।

*आज सुबह रूप रजत भवन के लिए विहार, शांतिभवन में प्रवेश 28 को*

श्रमण संघीय वरिष्ठ प्रवर्तक सुकनमुनिजी म.सा. आदि ठाणा 5 सोमवार सुबह सुभाषनगर स्थानक से चन्द्रशेखर आजादनगर स्थित रूप रजत भवन के लिए विहार करेंगे। वहां मुनिवृन्द का 25 फरवरी तक प्रवास रहेगा। मुनिवृन्द 26 फरवरी को चन्द्रशेखर आजादनगर से विहार कर पुराना भीलवाड़ा में नाड़ी मोहल्ला स्थित महावीर भवन पहुचेंगे। यहां से विहार कर 28 फरवरी को शांतिभवन में होली चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश करेंगे। होली चातुर्मास का मुख्य कार्यक्रम 2 मार्च को आयोजित होगा। सुकनमुनिजी म.सा. ने बताया कि 6 मार्च तक शांतिभवन में प्रवास की भावना है उसके बाद आगे का विहार कार्यक्रम तय होगा।

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