खजुरिया की महिलाओं की जीत, चंद्रभागा नदी में बजरी दोहन को लेकर धरना समाप्त
पोटलां। उपतहसील मुख्यालय से होकर बहने वाली चंद्रभागा नदी को बचाने के लिए चल रहा आंदोलन आखिरकार महिलाओं की जीत के साथ समाप्त हुआ। चंद्रभागा नदी में बजरी दोहन के विरोध में खजुरिया सहित आसपास के ग्रामीणों द्वारा पिछले एक माह से धरना प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसे प्रशासन के दबाव में ग्रामीणों ने समाप्त कर दिया था। इसके बाद करीब दस दिन पूर्व खजुरिया गांव की महिलाएं स्वयं आगे आईं और नदी के बीच बैठकर बजरी दोहन पर रोक की मांग को लेकर धरना शुरू किया।
दस दिनों तक लगातार धरना चलता रहा। इस दौरान कई बार प्रशासन और महिलाओं के बीच वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। महिलाओं की स्पष्ट मांग थी कि ठेकेदार खजुरिया बावजी की सीमा क्षेत्र को छोड़कर अन्य स्थानों पर बजरी दोहन करे, उन्हें उससे कोई आपत्ति नहीं है। इसी मांग पर महिलाएं अड़ी रहीं और वार्ताएं बार-बार असफल होती रहीं।
बुधवार दोपहर लीज कंपनी के मैनेजर गौतम सिंह और ठेकेदार सत्तू शर्मा मौके पर पहुंचे और धरना दे रही महिलाओं से सीधी वार्ता की। महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जहां वे धरना दे रही हैं, वहां से मेड बंदी कर दी जाए और खजुरिया बावजी की सीमा क्षेत्र में बजरी दोहन बंद किया जाए, तो वे धरना समाप्त कर देंगी। वार्ता के दौरान ठेकेदार और कंपनी मैनेजर ने महिलाओं की सभी शर्तें स्वीकार कर लीं।
इसके बाद महिलाओं ने खजुरिया श्याम के जयकारे लगाते हुए अपना धरना समाप्त किया। इस अवसर पर लीज कंपनी के मैनेजर गौतम सिंह ने बताया कि कंपनी सरकार से लीज लेकर बजरी दोहन कर रही थी, लेकिन ग्रामीणों और महिलाओं की भावनाओं को देखते हुए आपसी सहमति से समाधान निकाला गया है। उन्होंने बताया कि जहां महिलाएं धरना दे रही थीं, वहां से मेड बंदी कर दी जाएगी और खजुरिया बावजी की सीमा क्षेत्र में बजरी दोहन नहीं किया जाएगा। लीज क्षेत्र के अन्य हिस्सों में कंपनी द्वारा बजरी दोहन पूर्ववत जारी रहेगा।
कंपनी की ओर से ग्रामीणों को सभी शर्तों को लेकर लिखित पत्र भी दिया गया है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में महिलाओं के खिलाफ धारा 132 के तहत कार्रवाई को लेकर उपखंड अधिकारी को दिया गया ज्ञापन वापस लिया जाएगा और महिलाओं के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस प्रकार आपसी समझौते के साथ चंद्रभागा नदी को लेकर चला आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।
