LIVE : Day-06 | श्री शिव महापुराण कथा : पैसा नहीं, बल्कि इंसान की नीयत बिगाड़ती है हालात — पंडित प्रदीप मिश्रा, महंत बाबू गिरी आज से महामंडलेशवर

Update: 2026-04-13 08:44 GMT

लवाड़ा । शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पांडाल में पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। कथा के प्रारंभ में उन्होंने धन और मानवीय व्यवहार पर चर्चा करते हुए कहा कि अक्सर लोग कहते हैं कि पैसा व्यक्ति को बिगाड़ देता है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है; सच तो यह है कि लोगों ने ही पैसे के सदुपयोग और उसकी गरिमा को बिगाड़ दिया है।

मिश्रा ने एक सटीक उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह भोजन करते समय यदि सब्जी में नमक कम हो, तो व्यक्ति का ध्यान बार-बार उसी कमी पर जाता है, ठीक उसी तरह मनुष्य दूसरों की अच्छाइयों को छोड़कर केवल बुराइयां खोजने में लगा रहता है। उन्होंने आह्वान किया कि किसी की भी निंदा करने से बचना चाहिए, चाहे वे संत-महंत हों या कोई सामान्य व्यक्ति।


महंत बाबू गिरी महाराज का महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक

कथा के मुख्य प्रसंग से पूर्व आज एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। कथा आयोजक और संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबू गिरी महाराज का 'महामंडलेश्वर' के रूप में पट्टाभिषेक किया गया। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए शीर्ष संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह में उपस्थित प्रमुख विभूतियां:

निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर महेशानंद महाराज, देहरादून के महामंडलेश्वर शांति स्वरूप महाराज, सचिव महंत रविंद्र पुरी व महंत राम रतन गिरी, महंत दिनेश गिरी व कुबेर भंडारी मंदिर (करनाली) के महंत राकेश गिरी, गुरु शिखर (राजस्थान) के महंत राजगिरी, श्रवण नाथ मठ (हरिद्वार) से महंत राम सेवागिरी, सचिव (प्रयागराज) महंत नीलकंठ गिरी।

इस आध्यात्मिक महोत्सव में संतों के सान्निध्य ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय और भक्तिमय बना दिया।

जिस पर दुनिया हंसी, उसी ने रचा इतिहास

प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने एक बार फिर अपने प्रवचन के दौरान जीवन के गूढ़ रहस्य को साझा करते हुए संघर्ष कर रहे लोगों का उत्साहवर्धन किया है। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर उन लोगों का उपहास उड़ाया जाता है जो लीक से हटकर कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि सफलता उन्हीं के कदम चूमती है।

पंडित मिश्रा ने कहा, "जिस-जिस पर यह दुनिया हंसी है, उसी ने इतिहास रचा है।" उन्होंने समझाया कि जब आप कोई बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो शुरुआत में लोग आपकी क्षमताओं पर संदेह करेंगे और आपका मजाक भी उड़ा सकते हैं। लेकिन यह उपहास ही वह अग्नि है जो व्यक्ति को निखारती है। महापुरुषों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दुनिया के जितने भी बड़े आविष्कारक, क्रांतिकारी या सफल व्यक्तित्व हुए हैं, उन्हें अपने शुरुआती दौर में समाज के कड़े विरोध और हंसी का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे दुनिया की बातों की परवाह किए बिना अपने कर्म पथ पर अडिग रहें। यदि लोग आप पर हंस रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो साधारण लोगों की समझ से परे है। यही संघर्ष एक दिन आपको सफलता के उस शिखर पर ले जाएगा जहाँ दुनिया आपके लिए तालियां बजाएगी।


मुस्कुराहट में है हर समस्या का समाधान

प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्तों को जीवन जीने की एक नई राह दिखाते हुए कहा कि मनुष्य को हमेशा हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी कोई आपसे कुछ पूछे या किसी बात का प्रतिवाद करे, तो उसका उत्तर हमेशा एक मुस्कुराहट के साथ दें।

पंडित मिश्रा के अनुसार, मुस्कुराहट केवल चेहरे की चमक नहीं है, बल्कि यह आपके भीतर के धैर्य और सकारात्मकता का प्रतीक है। मुस्कुराकर दिया गया जवाब बड़े से बड़े विवाद को टाल सकता है और सामने वाले के क्रोध को शांत करने की शक्ति रखता है। उन्होंने कहा कि कटु वचनों का उत्तर यदि कटुता से दिया जाए तो क्लेश बढ़ता है, लेकिन यदि वही उत्तर मुस्कुराहट के साथ दिया जाए तो वह शालीनता बन जाता है।



बेटियां माता-पिता को कन्यादान का अवसर दें, गलत कदम न उठाएं"

सीहोर वाले मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने बेटियों और युवाओं के लिए एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि बेटियों को जीवन में कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे उनके माता-पिता के सम्मान को ठेस पहुंचे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक बेटी  अपने माता प‍िता को  'कन्यादान' का अवसर दें । वही पुण्य कार्य है, जो उन्हें सीधे स्वर्ग के मार्ग की ओर ले जाता है।

पंडित मिश्रा ने कहा कि हिंदू धर्म में कन्यादान को महादान माना गया है। जब माता-पिता अपनी बेटी का हाथ योग्य वर के हाथ में सौंपते हैं, तो वह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन की तपस्या का फल होता है। उन्होंने बेटियों से आग्रह किया कि वे भावनाओं में बहकर या किसी दबाव में आकर ऐसा कोई निर्णय न लें, जिससे परिवार की प्रतिष्ठा धूमिल हो। उनके अनुसार, माता-पिता की सेवा और उनके द्वारा किए गए कन्यादान से बढ़कर एक बेटी के लिए और कोई धर्म नहीं है।

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