महात्मा ज्योतिबा फूले की 200वीं जयंती: भीलवाड़ा में 'प्रेरणा दिवस' के रूप में भव्य आयोजन

Update: 2026-04-11 10:17 GMT

भीलवाड़ा । फूले सेवा संस्थान एवं राजस्थान प्रदेश माली सैनी महासभा के तत्वावधान में शनिवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फूले की 200वीं जयंती अत्यंत उत्साह के साथ मनाई गई। शहर के देवरिया बालाजी स्थित महात्मा फूले की प्रतिमा पर समाज के विभिन्न वर्गों और अनुयायियों ने माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस गौरवशाली अवसर को समाज ने 'प्रेरणा दिवस' के रूप में मनाते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

समानता और महिला शिक्षा के अग्रदूत थे फूले

संस्थान के अध्यक्ष गोपाल लाल माली ने संबोधित करते हुए महात्मा फूले के जीवन संघर्ष और सामाजिक सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और समानता के लिए फूले द्वारा किए गए कार्य आज भी प्रासंगिक हैं। महासभा के जिला अध्यक्ष भैरू लाल माली ने कहा कि फूले ने अपना संपूर्ण जीवन अज्ञानता और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि एक साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने जातिगत भेदभाव को चुनौती दी और समाज में वैचारिक क्रांति का सूत्रपात किया।

1848 में खोला था देश का पहला बालिका विद्यालय

महासभा के युवा जिला अध्यक्ष उदयलाल माली ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि महात्मा फूले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फूले के साथ मिलकर सन 1848 में देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू कर शिक्षा की मशाल जलाई थी। वक्ताओं ने जोर दिया कि फूले न केवल शिक्षा के समर्थक थे, बल्कि वे किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए भी सबसे प्रखर आवाज थे।

उपस्थित गणमान्य जन

इस अवसर पर महासभा के प्रदेश सचिव हरनारायण माली, जिला महामंत्री सत्यनारायण माली (डाबला), वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजकुमार माली (पत्रकार), माली सैनी कर्मचारी संस्था के जिला अध्यक्ष तोताराम माली, और सचिव कन्हैया लाल बुलीवाल सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक और युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने महात्मा फूले के आदर्शों को जीवन में उतारने की शपथ ली।

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