सिन्धी भाषा के सम्मान में गूंजे तराने, सफल परीक्षार्थियों का हुआ सम्मान
भीलवाड़ा । सिन्धी भाषा दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय सिन्धु सभा द्वारा आज शहर में एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के प्रबुद्धजनों ने सिन्धी संस्कृति और भाषा के संरक्षण का संकल्प लिया।
सभा के नगर प्रवक्ता किशोर लखवानी ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ वीरूमल पुरशानी, परमानंद गुरनानी, हीरालाल गुरानानी और परमानंद तनवानी ने आराध्य देव भगवान झूलेलाल की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर किया। इसके पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ, जिसमें ज्योति गुरनानी, ममता सिंधी, ज्योति जेठानी और किशोर कृपलानी ने सुमधुर सिन्धी गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य वक्ता ओम प्रकाश गुलाबानी ने अपने संबोधन में सिन्धी भाषा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल 1967 को चेटीचंड के शुभ अवसर पर ही सिन्धी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई थी। हर्ष का विषय है कि आज ही के दिन भारतीय संविधान के सिन्धी अनुवाद का लोकार्पण देश के उपराष्ट्रपति द्वारा किया गया है। कार्यक्रम में रमेश मैठानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
प्रमाण पत्र वितरण:
समारोह के दौरान NCPSL परीक्षाओं के अंतर्गत सत्र 2024-25 के सिन्धी सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन ओम प्रकाश गुलाबानी ने किया।
इस विशेष अवसर पर गंगाराम पेशवानी, बलराम सिंधी, धीरज पेशवानी, अनिल झामनानी, लक्ष्मण लालवानी, अशोक हरजानी, कमल वैशनानी, चंद्रप्रकाश तुलसानी सहित बड़ी संख्या में महिला शिक्षा मित्र और समाजजन उपस्थित रहे।
