भू-प्रबंधन विभाग के नए नियमों पर विधायक कोठारी ने जताई आपत्ति, मुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री को लिखा पत्र

Update: 2026-03-30 11:41 GMT

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने प्रदेश में भू-प्रबंधन विभाग द्वारा नवीन तकनीकी के आधार पर किए जा रहे सर्वेक्षण और पुन: सर्वेक्षण के दिशा-निर्देशों में संशोधन की पुरजोर मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव, अध्यक्ष राजस्व मंडल और आयुक्त भू-प्रबंध विभाग को पत्र लिखकर किसानों के हित में नियमावली की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

विधायक कोठारी ने पत्र में बताया कि "राजस्थान सर्वेक्षण नियमावली भाग-2 (2019)" के बिंदु संख्या 20(3) के प्रावधानों के कारण किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी किसान की जमाबंदी में दर्ज क्षेत्रफल और मौके पर वास्तविक कब्जे में अंतर पाया जाता है, तो वास्तविक कब्जे के अनुसार ही क्षेत्रफल दर्ज करने के निर्देश हैं।

किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात की आशंका

कोठारी ने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि किसी किसान के नाम जमाबंदी में 10 बीघा भूमि दर्ज है, लेकिन मौके पर कब्जा केवल 8 बीघा पर ही मिलता है, तो सर्वे के दौरान उसका रकबा घटाकर 8 बीघा कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल किसानों के अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि प्रदेश भर के राजस्व न्यायालयों में हजारों नए विवाद और मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी।

प्रशासनिक त्रुटि का खामियाजा किसान क्यों भुगते?

विधायक ने तर्क दिया कि भूमि आवंटन के समय किसान उतने ही रकबे पर कब्जा करता है, जितना उसे राजस्व विभाग के पटवारी या कार्मिक द्वारा मौके पर दिया जाता है। यदि तत्कालीन कर्मचारियों की लापरवाही से किसान को कम भूमि मिली है, तो इसका दंड किसान को नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि गांव का कुल रकबा सुरक्षित है, तो कम पाए गए रकबे की पूर्ति उसी गांव की राजकीय भूमि से की जानी चाहिए।

प्रमुख मांगें:

राजस्थान सर्वेक्षण नियमावली भाग-2 (2019) के बिंदु संख्या 20 की पुनः समीक्षा की जाए।

यह सुनिश्चित हो कि किसी भी खातेदार का रकबा साबिक जमाबंदी (पुराने रिकॉर्ड) से कम दर्ज न हो।

जहां कब्जा कम मिले, वहां उपलब्ध सरकारी भूमि से रकबे की पूर्ति कर उसे किसान के नाम दर्ज किया जाए।

विधायक कोठारी ने विश्वास जताया कि इन संशोधनों से किसानों के साथ न्याय होगा और अनावश्यक कानूनी पेचीदगियों से बचा जा सकेगा।

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