पटेलनगर में प्रतिबंधित प्लास्टिक कप फैक्ट्रियों पर छापा, दो इकाइयां सीज

Update: 2026-02-13 06:40 GMT

भीलवाड़ा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने प्रतिबंधित प्लास्टिक लेयर कप के निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पटेलनगर क्षेत्र में संचालित दो फैक्ट्रियों को सीज कर दिया। दोनों इकाइयों में करीब 60 क्विंटल तैयार माल भरा मिला।

जानकारी के अनुसार प्रत्येक फैक्ट्री में प्रतिदिन 50 एमएल से 200 एमएल तक के लगभग साढ़े तीन लाख प्रतिबंधित प्लास्टिक लेयर कप तैयार किए जा रहे थे। इनकी सप्लाई भीलवाड़ा सहित प्रदेश के कई जिलों में की जा रही थी।

कार्रवाई के दौरान मंडल की टीम ने मौके पर ही उत्पादन बंद करवाया और दोनों इकाइयों के गोदाम, मशीनों तथा तैयार माल को सीज कर दिया। मंडल अब इन फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन काटने के लिए बिजली निगम को पत्र लिखेगा।

मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक धनेटवाल ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक 6 दिसंबर 2024 से पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। पटेलनगर क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड के मकान में सिंगल यूज प्लास्टिक कोटेड कप की मैन्युफैक्चरिंग की सूचना पर अधीक्षण वैज्ञानिक अधिकारी महेश कुमार सिंह के नेतृत्व में जितेंद्र मीणा व कन्हैया लाल कुमावत की टीम ने मैसर्स कविता शर्मा एवं मैसर्स आरडी एंटरप्राइजेज पर जांच की।

जांच में प्लास्टिक कोटेड कप का निर्माण पाया गया, जिसके बाद दोनों इकाइयों को सीज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान नगर निगम के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक संजय खोखर तथा होमगार्ड इंचार्ज जोरावर सिंह भी मौजूद रहे।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ दीपक धनेटवाल के अनुसार, प्रतिबंधित प्लास्टिक आइटम की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की सटीक सूचना देने वाले को 15 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। वहीं प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री, परिवहन या भंडारण की जानकारी देने पर प्रति क्विंटल एक हजार रुपये के हिसाब से अधिकतम 10 हजार रुपये तक का इनाम निर्धारित है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक कोटेड कप जब गर्म चाय, कॉफी या अन्य गर्म पेय के संपर्क में आते हैं तो उनकी अंदरूनी प्लास्टिक परत ढीली होकर सूक्ष्म कणों के रूप में तरल में मिल सकती है। ये माइक्रो प्लास्टिक कण पेय के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे कणों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विभिन्न अध्ययनों में माइक्रो प्लास्टिक के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव, जैसे हार्मोनल असंतुलन, पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बताया गया है।

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