समाज में बदलते सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक अपेक्षाओं को लेकर बहस छिड़नी चाहिए
भीलवाड़ा |राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के आमल्दा गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक पिता ने अपनी जीवित बेटी के अंतर्जातीय युवक से प्रेम विवाह कर लेने से बेटी को मृत मानते हुए उसका शोक संदेश छपवा कर शोक बैठक रख जीवित बेटी का मृत्यु भोज करने की कार्यक्रम तय कर दिया.मामले की गंभीरता को देखते हुए भीलवाड़ा जिला पुलिस अधीक्षक ने पिता को मृत्युभोज नहीं करने और बैठक नहीं रखने के निर्देश दिए. इसके बाद पिता ने मृत्युभोज नहीं करने का निर्णय लेते हुए प्रस्तावित बैठक भी समाप्त कर दी !
पिता की वेदना - लड़की के पिता का कहना है कि यह एक दुखी पिता की वेदना है कि जिस कुल में उनका जन्म हुआ है, उसकी मान-मर्यादा को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया. उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि मोबाइल की लत से बाहर निकलकर अच्छा ज्ञान प्राप्त करें और अपने माता-पिता का सम्मान बनाए रखें.!
इस सन्दर्भ में अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भीलवाड़ा द्वारा " चर्चा चाय पर " का आयोजन क्लब के जिला कार्यालय में आयोजित किया गया !
वक्ताओं ने कहा कि समाज में बदलते सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक अपेक्षाओं को लेकर हर एक समाज के प्लेटफार्म पर बहस व चर्चा होनी चाहिए !
इस वैचारिक वार्ता में यह निष्कर्ष उभर कर आया कि - यह केवल किसी एक आमलदा गांव की नहीं, किसी एक समाज की नहीं, किसी एक माता पिता की नहीं, बल्कि पूरे देश के कई गांवों की, कई समाजों की, कई माताओं पिताओं के सामने आने वाली समस्या है ! माता-पिता अपने बच्चों को बड़ी उम्मीदों के साथ पढ़ाते-लिखाते हैं, लेकिन कई बार युवा गलत रास्ता चुन लेते हैं. हम में से किसी को भी संविधान से कोई आपत्ति नहीं है और हम उसका सम्मान करते हैं, युवा पीढ़ी हमारी स्वयं की है, लेकिन प्रत्येक समाज के कुछ सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य भी होते हैं , जिन्हें बचाना आवश्यक है !
कई बार परिस्थितियोंवश माता पिता और परिवार की सहमति से अन्तर्जातीय विवाह होते हैं, हमारा मानना है कि माता-पिता की सहमति के बिना होने वाले ऐसे विवाहों पर सभी को विरोध करना चाहिए , विशेष तौर पर कानूनों में बदलाव करना चाहिए - संशोधन होना चाहिए , माता पिता की सम्पत्ति से बेदखल किया जाना चाहिए !
वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में परिवार छोटे हो गये है, परिवारों में एक दो संतानें होती है, जिसका फायदा युवा पीढ़ी यह सोचकर की - हमारे अलावा इनका है ही कौन..??? माता पिता अभी नहीं मान रहे हैं तो मान जाएंगे कुछ सालों में !
एक लाचार और दुःखी पिता के इस क्रांतिकारी कदम ने - युवा पीढ़ी की मनमानी के आगे घुटने टेक चुकी बुजुर्ग पीढ़ी और माता पिता को एक सम्मान की राह अवश्य दी है !
अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत के राष्ट्रीय महासचिव डॉ अशोक सोडाणी एवं भीलवाड़ा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील दरक के नेतृत्व में क्लब की भीलवाड़ा जिला शाखा द्वारा समाज में क्रांति का बिगुल बजाने वाले इन मां बाप का सम्मान समारोह पूर्वक किया जाएगा !
