जैव ऊर्जा के उपयोग पर प्रशिक्षण आयोजित
भीलवाड़ा |कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा पर डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, उदयपुर तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण बायोमास प्रसंस्करण, बायोगैस उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण विषय पर दिनांक 17 से 21 मार्च तक आयोजित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डाॅ. सी. एम. यादव ने बायोमास प्रसंस्करण, बायोगैस उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण के महत्त्व एवं आवश्यकता पर चर्चा करते हुए अपशिष्ट प्रबन्धन, पर्यावरण अनुकूलता एवं देश के आर्थिक विकास में भागीदारी के बारे में बताया। डाॅ. यादव ने ऊर्जा संसाधन के रूप में बायोगैस की उपयोगिता की विस्तार से व्याख्या की तथा एमएसएमई के तहत् पंजीयन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। डेयरी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, उदयपुर से डाॅ. निकिता वधावन ने महाविद्यालय की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी देते हुए बायोमास एवं बायोगैस प्राप्त करने की विधि समझाते हुए इनके प्रमुख स्त्रोतो से अवगत कराया। कृषि अभियान्त्रिकी के पूर्व प्रोफेसर डाॅ. ओ. पी. पारीक ने प्रमुख ऊर्जा स्त्रोत एवं उनके घटको के बारे में चर्चा की। प्रशिक्षण में डाॅ. एच. एल. बुगालिया, अजित सिंह राठौड़, एफपीओ के निदेशक महावीर शर्मा, लालचन्द कुमावत एवं नन्द लाल सेन ने ऊर्जा के प्रमुख रूप एवं उपयोग पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण में 25 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया जिन्हे विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कलेण्डर वितरित किया गया।