बंगाली और बिहारी कारीगरों पर तीहरी मार: पलायन, महँगाई और गैस किल्लत से संकट में रोज़गार
भीलवाड़ा/उदयपुर हलचल .भीलवाड़ा के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में काम कर रहे बंगाली सोने चांदी और निर्माण कारीगरों और बिहारी श्रमिक इन दिनों तीहरी मार झेल रहे है। जहां सोना-चांदी के बढ़े दामों से काम प्रभावित हुआ, पश्चिम बंगाल चुनाव के चलते कारीगरों का पलायन बढ़ा और गैस सिलेंडर की किल्लत ने हालात और कठिन बना दिए है। भविष्य की चिंताओं को लेकर बिहारी श्रमिकों की आवक थम गई है, वहीं जो यहां काम कर रहे हैं, वे संकट टलने का इंतजार कर रहे हैं। भविष्य में संभावित संकट को लेकर प्रवासी परिवारों में चिंता गहराने लगी है।शहर में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल, बिहारी और झारखंड के श्रमिक विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इनमें खासतौर पर ज्वेलरी उद्योग में बंगाली कारीगरों की बड़ी भूमिका है। सोशल मीडिया की अफवाहों में संभावित लॉकडाउन जैसी चर्चाओं ने भी चिंता बढ़ा दी है। श्रमिकों को डर है कि यदि कामकाज प्रभावित हुआ तो उन्हें फिर से बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि कई लोग पहले ही गांव लौटने की तैयारी में है।
संकट एक: करीब एक साल से सोने-चांदी के दाम बढ़ने के साथ ही स्वर्ण आभूषणों की कारीगरी करने वाले बंगाली कारीगरों का काम कम हो गया है। व्यापारी पहले आभूषण बनाने के लिए बड़ी मात्रा में सोना दे देते तह लेकिन अब जरूरते के हिसाब से ही काम भरोसे के लोगो से ही करवाने लगे हे ji
- संकट दो: पश्चिम बंगाल में चुनाव है, वहां एसआईआर की प्रक्रिया में हमेशा के लिए नाम कटने के डर से बंगाली कारीगर घर लौट रहे हैं।
- संकट तीन: वैश्विक संकट के चलते जहां गैस की आपूर्ति करीब एक माह से प्रभावित है, वहीं आगे संकट गहराने का डर सभी प्रवासियों में बना हुआ है।
राजस्थान के कारोबारी सहमे...
विवाह समारोहों में डोम व फ्लॉवर डेकोरेशन में बंगाल के श्रमिक एक्सपर्ट हैं। पहले चरण के चुनाव के तुरंत बाद कई समारोह हैं, ऐसे में श्रमिक नहीं लौटे तो काम लेना मुश्किल होगा। पहले से लिए काम के लिए कुछ श्रमिकों को मतदान के अगले दिन फ्लाइट से बुलाने की तैयारी है। जूलरी मैन्युफैक्चरिंग पर भी असर का खतरा है। बुटीक-हैंडीक्राफ्ट से जुड़े कारीगरों के जाने से विवाह सीजन प्रभावित होने की आशंका है।
