नाममात्र की रह गई शादी, पति ने शारीरिक संबंध बनाने से किया इनकार तो कोर्ट ने रद्द किया विवाह

Update: 2026-02-21 09:59 GMT

 पुणे | महाराष्ट्र के पुणे कोर्ट से एक बेहद हैरान करने वाला कानूनी फैसला सामने आया है। एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उस विवाह को जड़ से निरस्त कर दिया, जिसमें शादी के वर्षों बाद भी पति-पत्नी के बीच एक बार भी शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हुए थे। पति द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने के बाद अदालत ने यह कड़ा कदम उठाया।

पत्नी का दर्द: "कोशिशों के बाद भी पति बनाए रखता था दूरी"

अदालत में सुनवाई के दौरान पत्नी ने भावुक होते हुए बताया कि शादी के बाद उसने एक सामान्य वैवाहिक जीवन जीने की लाख कोशिशें कीं, लेकिन पति हमेशा उससे दूरी बनाए रखता था। शुरुआत में उसे लगा कि शायद पति संकोच कर रहे हैं, लेकिन महीनों और सालों बीत जाने के बाद भी स्थिति नहीं बदली। पत्नी का आरोप था कि यह शादी केवल कागजों तक सीमित रह गई थी, जिसके कारण उसे भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

पति ने कोर्ट में कबूला सच: "नहीं थी पत्नी में दिलचस्पी"

हैरानी की बात यह रही कि पति ने भी अदालत में लिखित बयान देकर अपनी पत्नी के आरोपों को सही ठहराया। उसने स्वीकार किया कि विवाह के बाद उनके बीच कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बने। जब दोनों पक्षों के बीच तथ्यों को लेकर कोई विवाद नहीं रहा और प्रतिवादी (पति) ने स्वयं अपनी कमी स्वीकार कर ली, तो मामले ने नया मोड़ ले लिया।

कोर्ट का फैसला: हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी निरस्त

न्यायाधीश बी. डी. कदम ने मामले की गंभीरता और पति के स्वीकारोक्ति बयान को आधार मानते हुए हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का सहारा लिया। कोर्ट ने माना कि बिना शारीरिक संबंधों के विवाह का कोई विधिक औचित्य नहीं रह जाता। अदालत ने लंबी गवाही और विस्तृत सुनवाई के बजाय तथ्यों के आधार पर इस विवाह को विधिक रूप से निरस्त  घोषित कर दिया।

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