कलकत्ता हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: असफल प्रेम संबंध बलात्कार नहीं

Update: 2026-02-18 10:36 GMT


​कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक कानूनी मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि सहमति से बने शारीरिक संबंधों के बाद यदि शादी नहीं हो पाती, तो उसे आपराधिक मामला (बलात्कार या धोखाधड़ी) नहीं माना जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि कानून का उद्देश्य प्रेम संबंधों की विफलता को अपराध में बदलना नहीं है।

​मामले के मुख्य बिंदु

​आरोप: एक महिला ने पुरुष पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, धोखाधड़ी (IPC 417), बलात्कार (IPC 376) और धमकी (IPC 506) के आरोप लगाए थे।

​पृष्ठभूमि: दोनों के बीच संबंध 2017 में शुरू हुए थे। 2018 में महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया और यह रिश्ता लंबे समय तक चला।

​कोर्ट का तर्क: अदालत ने पाया कि यह कोई अचानक या दबाव में बनाया गया संबंध नहीं था, बल्कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चला आपसी सहमति का रिश्ता था।

​अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

​कानून का दुरुपयोग: आपसी सहमति से बने संबंध टूटने पर उसे 'आपराधिक रंग' देना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे मामलों से न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है।

​व्यक्तिगत स्वतंत्रता: यदि दो वयस्क अपनी मर्जी से रिश्ते में हैं, तो शादी न हो पाने की स्थिति में इसे 'क्रिमिनल ऑफेंस' नहीं माना जा सकता।

​तथ्यों की गहन जांच: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर असफल प्रेम संबंध को दुष्कर्म या धोखाधड़ी का मामला बना देना गलत है; इसके लिए परिस्थितियों की गहराई से जांच जरूरी है।

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