मोहन भागवत की 'हुंकार': न हम भाजपा के रिमोट कंट्रोल, न किसी के दबाव में झुकने वाले!
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान लखनऊ में पूरी तरह 'तेवर' में नजर आए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन तमाम चर्चाओं पर विराम लगा दिया, जिनमें संघ को भाजपा का 'बैकसीट ड्राइवर' बताया जाता है।
"हम भाजपा को नहीं चलाते"
भागवत ने दो-टूक शब्दों में कहा कि "संघ भाजपा का कोई रिमोट कंट्रोल नहीं है।" उन्होंने साफ किया कि स्वयंसेवक समाज के हर क्षेत्र में हैं और कुछ राजनीति में भी सक्रिय हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि संघ सरकार चलाता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, वे अपनी राजनीति चमकाने के लिए संघ को भी घसीटते हैं।
अमेरिकी टैरिफ और मंदिरों पर बड़ा बयान
अमेरिकी टैरिफ विवाद पर संघ प्रमुख ने भारत की बढ़ती ताकत का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि "दबाव बनाना कुछ देशों की पुरानी फितरत है," लेकिन आज का भारत इतना सक्षम है कि वह किसी आर्थिक या सामरिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा।
वहीं, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग पर उन्होंने एक नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ सरकारी नियंत्रण का नहीं, बल्कि 'मैनेजमेंट' का है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह सिख समाज अपने गुरुद्वारों का बेहतरीन संचालन करता है, उसी तरह हिंदू समाज और धर्माचार्यों को भी आगे आकर मंदिरों की जिम्मेदारी संभालने का खाका तैयार करना चाहिए।
सख्त संदेश: "घुसपैठियों को न मिले रोजगार"
लखनऊ की बैठकों में भागवत ने जनसंख्या असंतुलन और अवैध घुसपैठ पर भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट किया जाना चाहिए और उन्हें किसी भी हाल में रोजगार नहीं मिलना चाहिए। साथ ही, हिंदू समाज को एकजुट रहने और अपनी आबादी को लेकर सजग रहने की सलाह दी।
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