सोशल मीडिया पर सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तैयारी: बच्चों की सुरक्षा के लिए बैन पर चल रहा है मंथन
नई दिल्ली। देश में बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और डिजिटल खतरों को लेकर केंद्र सरकार अब पूरी तरह सतर्क मोड में है। दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' (AI Impact Summit) के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट संकेत दिए कि नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्ती या प्रतिबंध को लेकर सरकार गंभीर चर्चा कर रही है।
खबर के मुख्य बिंदु:
उम्र-आधारित नियंत्रण: सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ 'एज-बेस्ड एक्सेस कंट्रोल' और 'डीपफेक' जैसे मुद्दों पर लगातार संवाद कर रही है।
कानून का पालन अनिवार्य: मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि Meta, X, YouTube और Netflix जैसी दिग्गज कंपनियों को भारत के संविधान और कानूनों के दायरे में ही काम करना होगा।
संसदीय समिति की राय: वैष्णव ने बताया कि एक संसदीय समिति ने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किया है और कड़े कानून बनाने के लिए संसद में व्यापक सहमति बनाने की आवश्यकता है।
वैश्विक उदाहरण: ऑस्ट्रेलिया (16 साल से कम पर बैन), फ्रांस और यूके की तर्ज पर भारत में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
डीपफेक पर कड़ा प्रहार: डीपफेक तकनीक को समाज के लिए खतरा बताते हुए मंत्री ने कहा कि मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं, भविष्य में और भी सख्त कानून लाए जाएंगे।
सरकार का उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना है जहां तकनीक का लाभ तो मिले, लेकिन वह समाज और विशेषकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न बने।
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