सरकार की नहीं, कुर्सी की गारंटी: सजा राजनीतिक दलों की कुर्सियों का बाजार, रोजाना बिक रही 1 हजार

By :  vijay
Update: 2025-07-08 08:04 GMT

सीवान  शहर में इन दिनों राजनीतिक दलों की सिंहासन कुर्सियां खुल्लमखुल्ला बिक रही हैं। जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है, कुर्सियों के इस बाजार में भी रौनक आ गई है। शहर के बाबूनीया रोड स्थित ललन कॉम्प्लेक्स की एक निजी दुकान में राजद, भाजपा, जदयू और जनसूराज जैसी पार्टियों के सिंबल वाली कुर्सियों की पूरी रेंज सजी है।

जानकार कहते हैं कि राजनीति में कुर्सी हमेशा पैसों का खेल रही है, लेकिन सीवान के दुकानदार इसे शब्दशः साबित कर रहे हैं। दुकान के मालिक सुशील कुमार ने बताया कि उन्होंने कोलकाता में पहली बार ऐसी कुर्सियों का बाजार देखा था और अब इसे सीवान में उतार दिया है। उनका कहना है कि अलग-अलग दलों के रंग और चिन्ह के हिसाब से कुर्सियां तैयार कराई जा रही हैं। भाजपा के लिए गेरुआ रंग, जदयू के लिए हरा-सफेद और तीर का निशान, राजद के लिए हरा रंग और लालटेन सब कुछ लोगों को खूब भा रहा है। सुशील कुमार के मुताबिक रोजाना करीब 1000 कुर्सियां बिक रही हैं और लाखों कुर्सियों के ऑर्डर अभी पेंडिंग हैं। उनका टारगेट रोजाना 10,000 कुर्सियां बेचने का है। दुकानदार ने कहा कि चुनाव भले 5 साल में एक बार होते हैं लेकिन कुर्सियों की डिमांड हर सीजन रहती है।

 



 



दुकानदार सुशील कुमार ने चुटकी लेते हुए कहा किसी भी पार्टी की सरकार बनेगी या नहीं, यह गारंटी नहीं है। लेकिन हमारी कुर्सियां एक साल की गारंटी के साथ आती हैं।’ उन्होंने बताया कि उनकी पटना में फैक्टरी है जहां ये कुर्सियां तैयार की जाती हैं और सीवान में बेची जा रही हैं। सुशील कुमार ने दावा किया कि भाजपा, राजद, जदयू, जनसूराज और लोजपा सभी पार्टियों की कुर्सियों की कीमत एक समान 650 रखी गई है। ‘‘मेरी नजर में सभी पार्टियां बराबर हैं, इसलिए सभी कुर्सियों की कीमत भी बराबर है।’ गौरतलब है कि चुनाव नजदीक आते ही सियासत में कुर्सी का खेल तो जोर पकड़ ही लेता है, लेकिन सीवान में यह खेल अब दुकानों में भी देखने को मिल रहा है भी पूरी गारंटी के साथ।

Similar News