राष्ट्रीय सुरक्षा को नई दिशा, केंद्र ने जारी की पहली आतंकवाद विरोधी नीति
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सोमवार को भारत की पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी नीति जारी की। इसे 'प्रहार' नाम दिया गया है। इस नीति में सीमा पार से होने वाले आतंकवाद, साइबर हमलों, ड्रोन और उभरती तकनीकों के गलत इस्तेमाल जैसे खतरों का प्रमुखता से जिक्र किया गया है। नीति में यह भी बताया गया है कि केवल सीमा पार से होने वाला आतंकवाद ही खतरा नहीं है, बल्कि आपराधिक हैकर और अन्य राष्ट्र भी भारत को निशाना बना रहे हैं।
नीति में कहा गया है कि भारत को जल, थल और वायु मार्गों से आतंकवादी खतरों का सामना करना पड़ता है। इसमें यह भी बतया गया है कि बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु उर्जा जैसे अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्षमताएं विकसित की गई हैं।
मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए रणनीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता। इसमें यह भी कहा गया है कि देश लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसमें जिहादी आतंकवादी संगठन और उनके मुखौटा संगठन लगातार हमलों की योजना बना रहे हैं।
नीति में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के नाम का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि ये जासूसों (स्लीपर सेल) के जरिये भारत में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि कईधशों से कट्टरपंथी आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश रच रहे हैं। नीति में यह भी बताया गया है कि सीमा पार से साजिशकर्ता उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। आतंकवादी समूह अब संगठित आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल अपने संचालन और नई भर्ती के लिए कर रहे हैं।
दस्तावेज में बताया गया है कि डिजिटल मोर्चे पर आतंकवादी सोशल मीडिया, इंस्टेट मैसेजिंग एप, एन्क्रिप्शन टूल, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल कर प्रचार, धन जुटाने और संचालन संबंधी मार्गदर्शन के लिए कर रहे हैं। इससे उनकी गतिविधियां गुमनाम बनी रहती हैं। नीति में कहा गया है कि रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु विस्फोटक, डिजिटल (सीबीआरएनईडी) सामग्री तक आंतकवादियों की पहुंच और उसका उपयोग करने के प्रयासों को रोकना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ड्रोन और रोबोट का घातक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करना भी चिंता का विषय है।
गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया कि प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर मुकदमा चलाने तक, जांच के हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि अपराधियों के खिलाफ मजबूत मामले तैयार किए जा सकें। इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर उपायों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है, ताकि सीमा पार आतंकवाद से निपटा जा सके।
