कॉफी का जायका: इंस्टेंट या फिल्टर, सेहत और स्वाद के लिए कौन सा विकल्प है बेहतर?
ऑफिस की सुस्ती दूर करनी हो या किसी खास के साथ डेट पर जाना हो, एक कप कॉफी हर माहौल को खुशनुमा बना देती है। कॉफी केवल एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि एक इमोशन है। दुनिया भर में लाटे, कैपुचीनो और एस्प्रेसो जैसे कई फ्लेवर मशहूर हैं, लेकिन जब बात रोजमर्रा की पसंद की आती है, तो मुकाबला 'इंस्टेंट' और 'फिल्टर' कॉफी के बीच होता है। दक्षिण भारत में तो फिल्टर कॉफी दैनिक जीवन और मेहमाननवाजी का अटूट हिस्सा है।क्या है इंस्टेंट कॉफी?नाम के अनुरूप ही यह कॉफी मिनटों में तैयार हो जाती है। इसे कॉफी बीन्स को रोस्ट और पीसकर बनाया जाता है, जिसे बाद में 'फ्रीज ड्राइंग' या 'स्प्रे ड्राइंग' प्रक्रिया से गुजरकर क्रिस्टल में बदल दिया जाता है। इसे सीधे गर्म दूध या पानी में घोलकर तुरंत पिया जा सकता है।फिल्टर कॉफी का पारंपरिक तरीकादक्षिण भारतीय संस्कृति की पहचान फिल्टर कॉफी को बनाने का तरीका काफी खास है। इसमें 'दबारा' (Dabara) नामक पीतल के बर्तन का उपयोग होता है।इसके ऊपरी हिस्से में कॉफी पाउडर और गर्म पानी डालकर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है।छलनी के जरिए कॉफी धीरे-धीरे छनकर नीचे जमा होती है, जिसे गर्म दूध और चीनी के साथ पीतल या स्टील के गिलास में परोसा जाता है।यह विधि कॉफी को एक रिच फ्लेवर और ऑथेंटिक अरोमा (सुगंध) प्रदान करती है।सेहत पर असर: कौन है विजेता?विशेषताइंस्टेंट कॉफीफिल्टर कॉफीकैफीनमात्रा कम होती है (सेंसिटिव लोगों के लिए अच्छी)मात्रा अधिक होती है (बेहतर फोकस और एनर्जी)कोलेस्ट्रॉलप्रोसेसिंग के दौरान तेल निकल जाते हैंछानने की प्रक्रिया में हानिकारक तेल (कैफेस्टोल) अलग हो जाते हैंशुद्धताकई बार आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैंपूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक तत्वों से भरपूरफायदातुरंत तैयार होने की सुविधाहार्ट और ब्रेन हेल्थ के लिए अधिक फायदेमंद