बैंक खाता फ्रीज करने पर राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पुलिस की मनमानी पर रोक, मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के नाम पर आम नागरिकों के बैंक खाते फ्रीज करने की पुलिसिया कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज करना असंवैधानिक है।
हाईकोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें:
मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी: जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने आदेश दिया कि अब पुलिस को किसी भी खाते को फ्रीज या अटैच करने से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सीमित अधिकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 106 के तहत पुलिस को केवल सीमित जब्ती का अधिकार है, जबकि पूर्ण खाता फ्रीज करने का अधिकार केवल मजिस्ट्रेट के पास है।
सिर्फ विवादित राशि पर ही 'होल्ड': यदि किसी खाते में केवल कुछ राशि संदिग्ध है, तो पुलिस पूरे खाते को 'डेबिट फ्रीज' नहीं कर सकती। केवल उस विशेष राशि पर ही लियन या होल्ड लगाया जाना चाहिए।
संविधान का उल्लंघन: कोर्ट ने "ब्लैंकेट फ्रीजिंग" (पूरा खाता बंद करना) को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन माना है।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराध रोकने के नाम पर निर्दोष नागरिकों का उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है और पुलिस को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से ही नियमानुसार जांच करनी चाहिए।
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