राजस्थान में VIP नंबरों का महाघोटाला: 600 करोड़ की चपत, 450 अधिकारियों-दलालों पर दर्ज होगी FIR
जयपुर। राजस्थान के परिवहन विभाग में वीआईपी (3 और 7 अंक) नंबरों के आवंटन को लेकर एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में सरकारी खजाने को करीब 600 करोड़ रुपये की भारी चपत लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार अब 450 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
कैसे हुआ 600 करोड़ का खेल?
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, वीआईपी नंबर लेने के लिए वाहन स्वामियों को एक मोटी सरकारी फीस या नीलामी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन विभाग के ही कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलकर दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने बिना किसी शुल्क के ही चहेते लोगों को ये कीमती नंबर आवंटित कर दिए। जांच में सामने आया है कि करीब 10,000 से अधिक वाहनों के नंबर आवंटन में गड़बड़ी हुई है।
1100 आरसी सस्पेंड, 39 पर केस दर्ज
इस मामले में जयपुर के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) राजेंद्र सिंह शेखावत ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है:
1100 वाहनों के पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।जयपुर के गांधी नगर पुलिस थाने में 39 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब बाकी बचे 450 से अधिक दोषियों पर भी गाज गिरनी तय है।
उपमुख्यमंत्री के सख्त निर्देश
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने इस घोटाले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। परिवहन आयुक्त पुरुषोतम शर्मा ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों (DTO) से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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