हाईकोर्ट सख्त: सरकारी स्कूलों के जर्जर हालात पर सरकार को घेरा; कहा- "बोर्ड लगा दो, बच्चे अपने रिस्क पर स्कूल आएं"

Update: 2026-02-16 18:19 GMT


​जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बदहाली और जानलेवा बनते जर्जर भवनों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की जमकर क्लास लगाई। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पेश किए गए बजट प्रावधानों को 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की।

​20 हजार करोड़ की दरकार, बजट में मात्र खानापूर्ति

शिक्षा विभाग ने खुद स्वीकार किया था कि प्रदेश के स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है, लेकिन सरकार ने बजट में मरम्मत के लिए महज 550 करोड़ और नए भवनों के लिए 450 करोड़ का प्रस्ताव रखा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार 2 हजार करोड़ भी नहीं जुटा पाई है। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा— "अगर संसाधन नहीं हैं तो सरकार स्कूलों के बाहर बोर्ड टांग दे कि बच्चे यहाँ अपनी रिस्क पर आएं।"

​फिजूलखर्ची पर रोक और कमेटी बनाने के संकेत

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि क्या सरकार के अन्य टैंडरों पर रोक लगा दी जाए ताकि यह पैसा स्कूलों के जरूरी कामों में खर्च हो सके? कोर्ट ने फंड के सही इस्तेमाल की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाने पर विचार शुरू कर दिया है।

​5 मार्च को होगी अगली सुनवाई

झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के बाद हाईकोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। अब 5 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट अतिरिक्त फंड जुटाने और कमेटी के गठन पर अंतिम फैसला ले सकता है।

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