जोधपुर: 17 साल पुराने ड्रग्स केस में फैसला, कॉन्स्टेबल की पत्नी को 2 साल की जेल
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर की विशिष्ट एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट ने शनिवार को एक दशक से भी पुराने मादक पदार्थ बरामदगी मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह मामला महामंदिर पुलिस थाने के सरकारी क्वार्टर से अफीम और स्मैक की बरामदगी से जुड़ा था। विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा की कोर्ट ने पुलिस कॉन्स्टेबल भजनलाल की पत्नी सरिता को दोषी करार देते हुए 2 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सबूतों के अभाव में कॉन्स्टेबल समेत 4 बरी
अदालत ने इस मामले में सह-अभियुक्त कॉन्स्टेबल भजनलाल, राजुराम, रणजीत सिंह और तारा सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि पुलिस की तकनीकी खामियों और पुख्ता सबूतों की कमी के चलते इन आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हो सका। यह मामला 21 मई 2009 का है, जब तत्कालीन थानाधिकारी ने गुप्त सूचना के आधार पर थाना परिसर स्थित सरकारी आवास पर दबिश दी थी।
सरकारी आवास में चल रहा था नशे का कारोबार
17 साल पहले हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को कॉन्स्टेबल भजनलाल के नाम आवंटित क्वार्टर से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ मिले थे। दबिश के समय कॉन्स्टेबल मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन उसकी पत्नी सरिता वहां मिली थी। तलाशी के दौरान एक ब्रीफकेस से 70 ग्राम अफीम और 10 ग्राम स्मैक बरामद हुई थी। साथ ही मौके से 1,53,900 रुपये की नकद राशि भी जब्त की गई थी।
महिला कॉन्स्टेबल ने पकड़ी थी छिपाई गई अफीम
कार्यवाही के दौरान आरोपी सरिता ने चालाकी दिखाते हुए एक थैली अपने कपड़ों में छिपाने की कोशिश की थी। महिला कॉन्स्टेबल द्वारा तलाशी लेने पर उस थैली से 12 ग्राम 'अफीम दूध' बरामद हुआ था। इसी बरामदगी और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सरिता को दोषी माना। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने पुलिस महकमे में भी चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि मामला पुलिस लाइन के भीतर सरकारी आवास से जुड़ा था।
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