विदेशी मेडिकल छात्रों की बढ़ी मुश्किलें: NMC ने ऑनलाइन पढ़ाई के बदले अनिवार्य की ऑफलाइन क्लास, दिल्ली में प्रदर्शन
नई दिल्ली। विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री लेकर लौटे भारतीय छात्रों के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) का नया आदेश बड़ी मुसीबत बन गया है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि कोरोना काल के दौरान की गई ऑनलाइन पढ़ाई को अब ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग के जरिए पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि छात्र ऐसा नहीं करते हैं, तो स्टेट मेडिकल काउंसिल उन्हें स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration) जारी नहीं करेगी।
क्या है NMC का नया आदेश?
एनएमसी सचिव डॉ. राघव लांगर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) ने 2020 और 2021 के बैच के दौरान अपने कोर्स का कोई भी हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया है, उन्हें अब उतनी ही अवधि की फिजिकल ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेनी होगी। आयोग ने 5 मार्च 2026 को जारी पब्लिक नोटिस का हवाला देते हुए साफ किया कि बिना वास्तविक ऑफलाइन ट्रेनिंग के जारी किए गए "कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट" मान्य नहीं होंगे और ऐसी डिग्रियां भारत में अवैध मानी जाएंगी।
छात्रों ने खोला मोर्चा, दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन
इस आदेश के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली स्थित एनएमसी मुख्यालय पर एकत्र हुए। छात्रों का तर्क है कि जब भारत के भीतर ऑनलाइन कक्षाओं को मान्यता दी गई है, तो विदेशी संस्थानों की ऑनलाइन पढ़ाई पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। जयपुर की डॉ. किरन, जो कजाकिस्तान से डिग्री लेकर लौटी हैं, ने कहा कि एनएमसी को छात्रों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। एफएमजी (FMG) छात्रों ने इस नियम में छूट के लिए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
आरएमसी (RMC) भी सख्त, पंजीकरण पर रोक
राजस्थान मेडिकल काउंसिल सहित अन्य राज्यों की परिषदों को भी यह निर्देश भेज दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है, तो उसे अपनी पढ़ाई की अवधि बढ़ाकर फिजिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी, अन्यथा उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलेगी।