चित्तौड़गढ़ में अफीम की खेती बनी नारकोटिक्स विभाग की कमाई का जरिया

Update: 2025-01-20 06:53 GMT

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ और उसके आस-पास के इलाकों में इन दिनों अफीम की खेती जारी है। नारकोटिक्स विभाग द्वारा इन दिनों खेतों में पैमाइश की जा रही है। इस पैमाइश का उद्देश्य यह देखना है कि कहीं किसान तयशुदा से अधिक भूमि में तो अफीम की खेती नहीं कर रहे। यह पैमाइश नारकोटिक्स विभाग के लिए काली कमाई का जरिया बन रही है।

 प्रत्येक किसान को अधिकतम 10 आरी भूमि पर अफीम उगाने की मंजूरी दी जाती है। किसानों को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे निर्धारित क्षेत्र से बाहर खेती न करें। नारकोटिक्स विभाग का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि किसान तयशुदा भूमि सीमा का पालन करें। किसानों के अनुसार, नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी पैमाइश के दौरान नियमों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

सामान्यत: पौधे की जड़ों से भूमि की माप की जानी चाहिए, लेकिन अधिकारी पौधों के पत्तों को मापते हैं। अफीम के पौधे के पत्ते अक्सर तयशुदा 10 आरी क्षेत्र से बाहर तक फैल जाते हैं। इस कारण, विभाग द्वारा की गई पैमाइश में क्षेत्र तय सीमा से अधिक दिखाया जाता है।

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