परियोजना के विकास से क्षेत्र में बढ़ेंगे पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार के अवसर - उप मुख्यमंत्री
जयपुर/उदयपुर, । उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना की क्रियान्विति के लिए 275.68 करोड़ रूपये की डीपीआर तैयार करवा ली गई है। साथ ही इस संबंध में राजस्थान धरोहर प्राधिकरण की अध्यक्षता में गठित समीक्षा समिति द्वारा 3 फरवरी, 2026 को इस डीपीआर अनुसार कार्य करवाये जाने का अनुमोदन किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नए पर्यटन सर्किट एवं योजना के विकसित होने के बाद प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर स्थानीय आमजन के लिए उपलब्ध होते हैं। राज्य सरकार की भी प्राथमिकता रहेगी कि स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय मेटेरियल सप्लायर्स एवं श्रमिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इनके अलावा टूर ऑपरेटर, गाइड, होटल, पार्किंग, कैफेटेरिया, सोवेनियर शॉप्स, हैण्डीक्राफ्ट्स एवं होमस्टे के कार्य से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ होगा।
पर्यटन मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्रीमती दीप्ति किरण माहेश्वरी द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना के अंतर्गत विकसित की जाने वाली परिसंपत्तियों के विकास से पूर्व इन सम्पतियों के समुचित देखरेख एवं संचालन के संबंध में स्थानीय निकायों से परामर्श कर प्रबंधन किया जाएगा। इन सम्पतियों का नियमित पर्यवेक्षण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला पर्यटन विकास समिति के माध्यम से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस सर्किट को डिजिटल प्रमोशन सम्बन्धी किसी अन्य योजना से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा योजनान्तर्गत प्रस्तावित स्थलों का प्रचार- प्रसार संचार के विभिन्न माध्यमों, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, विभाग के मीडिया प्लेटफार्म एवं विभागीय मुद्रण सामग्री के माध्यम से कर अधिकाधिक देशी- विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के समुचित प्रयास किये जाएंगे।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य बजट वर्ष 2024-25 के संबंध में प्रस्तुत वक्तव्य (8 फरवरी, 2024) के पैरा संख्या 55 अन्तर्गत महाराणा प्रताप के जीवन से जुडे विभिन्न स्थलों, चावण्ड-हल्टीघाटी-गोगुन्दा-कुम्भलगढ- दिवेर-उदयपुर आदि को सम्मिलित करते हुए महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकसित करने के लिये 100 करोड़ रूपये के प्रावधान करने की घोषणा की गई थी।
उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम एवं राजस्थान धरोहर प्राधिकरण को कार्यकारी एजेन्सी नियुक्त किया गया है तथा परियोजना अन्तर्गत किये जाने वाले कार्यों की मॉनिटरिंग राजस्थान धरोहर प्राधिकरण द्वारा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना की क्रियान्विति के लिए डीपीआर तैयार किए जाने के लिए 100 करोड़ रूपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जनवरी, 2025 में जारी की गई। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण द्वारा उक्त परियोजना हेतु तैयार की गई कॉन्सेप्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर रूपये 2 लाख 83 हजार पांच सौ रूपये की राशि का व्यय किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि महाराणा प्रताप सर्किट प्रोजेक्ट मेवाड़ के गौरव एवं जन श्रद्धा से जुड़े होने के कारण प्रोजेक्ट की रूपरेखा/कार्ययोजना तैयार करने हेतु विचार विमर्श करने के लिये विभिन्न स्तरों पर बैठकों का आयोजन किया जाकर प्राप्त सुझावों को सम्मिलित करते हुए डीपीआर तैयार की गई है, जिसमें प्रक्रियागत समय लगना स्वभाविक है। परियोजना की क्रियान्विति हेतु तैयार डीपीआर हेतु वित्तीय स्वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। वित्तीय स्वीकृति उपरांत तदनुसार विकास कार्य करवाये जाएंगे।
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मेवाड़ के गौरव के लिए बड़ी सौगात: महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के लिए 275.68 करोड़ की डीपीआर तैयार
जयपुर/उदयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने मंगलवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने 'महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट' विकास योजना के लिए 275.68 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल मेवाड़ की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अपार अवसर भी सृजित होंगे।
इन प्रमुख स्थलों का होगा कायाकल्प
बजट 2024-25 की घोषणा के अनुरूप, इस सर्किट में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
चावण्ड, हल्दीघाटी और गोगुन्दा
कुम्भलगढ़, दिवेर और उदयपुर
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए दीया कुमारी ने कहा कि इस परियोजना से टूर ऑपरेटर, गाइड, होटल व्यवसायी, हस्तशिल्प कलाकार और होमस्टे संचालकों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को भी बड़े स्तर पर रोजगार मिलेगा। संपत्तियों के प्रबंधन और नियमित पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला पर्यटन विकास समिति की होगी।
100 करोड़ से बढ़कर 275 करोड़ तक पहुँचा बजट
पर्यटन मंत्री ने जानकारी दी कि पूर्व में इस सर्किट के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे अब व्यापक कार्ययोजना के साथ बढ़ाकर 275.68 करोड़ रुपये कर दिया गया है। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण इस पूरे प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करेगा। वर्तमान में वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है, जिसके तुरंत बाद विकास कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। विभाग इस सर्किट को वैश्विक पटल पर लाने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का व्यापक प्रचार-प्रसार भी करेगा।
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