रोडवेज कर्मचारियों के लिए तीन महीने में बने तबादला नीति

Update: 2025-02-19 19:14 GMT

 

जयपुर। हाईकोर्ट ने रोडवेज को तीन महीने में अपने कर्मचारियों के लिए तबादला नीति बनाने को कहा है। तबादला नीति में कर्मचारियों की सामाजिक,आर्थिक स्थिति,पोस्टिंग का रिकार्ड,एक पोस्ट पर रहने की अवधि और प्रशासनिक आवश्यकता के पहलुओं का ध्यान रखा जाए और नीति के अनुसार की तबादले किए जाएं। अदालत ने तबादला नीति बनने तक याचिकाकर्ता कर्मचारियों के अभ्यावेदन तय करने तथा तब तक उनके तबादला आदेश स्थगित रखने के निर्देश दिए है। जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश सूर्यभान सिंह शेखावत व 14 अन्य याचिकाओं पर दिए।

अदालत को बताया गया कि रोडवेज प्रबंधन ने 15 जनवरी को करीब 240 अल्प वेतन भोगी चालक-परिचालकों का करीब 600 किलोमीटर दूर तक तबादला कर दिया। कुछ कर्मचारियों के तबादला आदेश निरस्त भी कर दिए। जबकि कई कर्मचारी कुछ महीने बाद ही रिटायर होने वाले है। रिटायरमेंट के नजदीक कर्मचारी का तबादला करना राज्य सरकार की नीति के विपरीत है। रोडवेज में कोई तबादला नीति नहीं है। इस कारण मनमर्जी से तबादले होते है।

रोडवेज ने ऐसी महिला कर्मचारियों के भी तबादले कर दिए जिनके बच्चों के बोर्ड और प्री-बोर्ड की परीक्षाएं होने वाली है। रोडवेज की ओर से कहा गया कि उसे अपने कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने के लिए तबादला करने का अधिकार है ।याचिकाकर्ताओं का भी प्रशासनिक कारणों से तबादले किए है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने रोडवेज को तीन माह में तबादला नीति बनाने और तब तक याचिकाकर्ताओं के तबादला आदेश को स्थगित करने के आदेश दिए है। 

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