क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षकसिंह को दी श्रद्धांजलि

Update: 2025-06-16 11:18 GMT

राजसमंद ( राव दिलीप सिंह परिहार) जिले के कुम्भलगढ में श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह  रोलसाहबसर की पुण्य स्मृति में कुम्भलगढ़ क्षेत्र का श्रद्धांजलि सभा आयोजन दिनाँक 15 जून, 2025 को नरसिंह भगवान मंदिर, नीमडी चौराहे पर रखा गया ।श्रद्धांजलि सभा में श्री क्षत्रिय युवक संघ संरक्षक भगवान सिंह  रोलसाहबसर को आसपास के क्षत्रियों के ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

संघ के सरंक्षक पूज्य भगवान सिंह  केवल क्षत्रिय युवक संघ के मुखिया ही नहीं रहे अपितु सर्व समाज और मानव मात्र के साथ साथ भारतीय संस्कृति के लिए पुरोधा बनकर जिस प्रकार से उन्होंने एक क्षत्रिय का जन्म के अनुरूप कार्य होना चाहिए वह जीवन जीकर एक आदर्श की स्थापना की। उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कर्म आधारित जीवन से क्षत्रिय को श्रेष्ठ और आदर्श साबित करके बताया।

उनकी दूरदृष्टि, समर्पण और निष्कलंक सेवा भावना ने उन्हें संघ का केवल संरक्षक नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत बना दिया था।यह बात रविवार को श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कही गई।सभी ने भगवान सिंह जी के जीवन मूल्यों, उनके संगठनात्मक कौशल और समाज निर्माण के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें एक युगपुरुष, एक विचारधारा के वाहक, और आध्यात्मिक-राजनीतिक संतुलन के प्रतीक के रूप में श्रद्धांजलि दी।संघ संरक्षक एवं मार्गदर्शक के देहावसान पर उनकी स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में राजपूत समाज के गणमान्य लोगों ने उनके प्रति आस्था और श्रद्धा प्रकट की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में वरिष्ठ सदस्य भगवान सिंह झीलवाड़ा, मोहन सिंह जस्सा जी का गुडा द्वारा भगवान सिंह की तस्वीर के समक्ष मालदार एवं दीप प्रज्वलित किया फिर तनसिंह द्वारा रचित झनकार गीतमाला में से श्रद्धांजलि गीत "जलवे अनेक रण के दिखा कर चले गए. का वाचन धनपाल सिंह झीलवाड़ा ने किया एवं गायन के साथ उपस्थित लोगों एवं स्वयंसेवकों द्वारा भगवानसिंह के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की गई। गोवर्धन सिंह चेचिंयो का गुडा ने दिव्य महामानव के जीवन से संबंधित परिचय प्रदान करते हुए उनका संघ प्रवेश, संस्थापक तनसिंह जी से संपर्क, विभिन्न नवाचार, संघ प्रणाली, मानवीय मूल्य और गीता के ज्ञान को जीवन में परिलक्षित के संबंध में विभिन्न जानकारी द्वारा परिचय प्रदान किया। कार्यक्रम में वक्ताओ कुबेर सिंह झीलवाड़ा, किशन सिंह मावा का गुडा ने भगवानसिंह जी से जुड़े हुए विभिन्न संस्मरण सुनाते हुए एक क्षत्रिय के जीवन के लिए आवश्यक बातें सहित भगवानसिंह में पाए जाने की स्मृतियां सुनाई तथा उनके दिए हुए संस्कारों को प्रकाश पुंज के रूप में अंगीकार करने की बात कही। उपस्थित लोगों ने एक ऋषि रूप में उनके आभामंडल और विशेष आकर्षण को चर्चा के दौरान साझा किया।

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