जैन संस्कार शिविर कार्निवल-2 की धूम जारी, 30 को होगा शिविर का समापन

By :  vijay
Update: 2025-03-29 13:15 GMT
जैन संस्कार शिविर कार्निवल-2 की धूम जारी, 30 को होगा शिविर का समापन
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उदयपुर,  । श्री जैन श्वेतांबर महासभा द्वारा संचालित श्री आदिनाथ जिनालय में आयोजित "जैन संस्कार शिविर कार्निवल 2" शिविर के सातवें दिन अत्यंत उत्साह और ज्ञान से भरपूर रहा। इस शिविर का उद्देश्य "खेल-खेल में सीखो जैन धर्म" के माध्यम से बच्चों को जैन संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विधियों का गहन ज्ञान प्रदान करना है। संस्थान सचिव कुलदीप नाहर ने बताया शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण पूजा विधियों को न केवल सीखा बल्कि श्रद्धा और आस्था के साथ उन्हें आत्मसात भी किया। बच्चों को मंदिर में पूजा करने की सही प्रक्रिया जैसे ध्वज दर्शन, धूप पूजा, केसर तिलक, अक्षत पूजा, नैवेद्य पूजा, फल पूजा और दीप पूजा का सटीक अभ्यास कराया गया। साथ ही, जैन मंदिर में प्रवेश के नियम, आचार-व्यवहार और पूजन विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। शिविर में आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास के लिए अनेक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें योग, ध्यान, ब्रेन गेम्स, स्वस्तिक और गहवाली बनाने की कला, कथा वाचन, संगीत की मूलभूत शिक्षा शामिल हैं। बच्चों ने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए अपनी भावनाओं को कविताओं और गीतों के माध्यम से व्यक्त किया। इन गतिविधियों ने बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास और संवाद कौशल को भी प्रबल किया। इस सम्पूर्ण शिविर और विद्यार्थियों को दिए गए सभी शिक्षण का श्रेय हमारे समर्पित और निष्ठावान शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने अपने कीमती समय और प्रयासों को पूर्ण हृदय से समर्पित किया। शिविर मेें पूजा शाह, सुमन पोखरना चित्तौड़ा, प्रमिला जैन, राजश्री जैन, कौशल्या मेहता, नीतु सिंघवी, हितांशी जैन, राजुल गांधी, अल्का कोठारी, स्वाति कोठारी, डिंपल गुगल्या आदि प्रशिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण दिया। 30 मार्च को शिविर का समापन एक भव्य संस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होगा, जिसमें विद्यार्थी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सीखे हुए कौशल और प्रतिभा का मंच पर प्रदर्शन करेंगे। यह कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास, संवाद क्षमता और रचनात्मकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। यह जैन संस्कार शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध हो रहा है और समाज में संस्कारों और धर्म के प्रचार-प्रसार का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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