
उदयपुर । सकल जैन समाज की प्रतिनिधि संस्थान महावीर जैन परिषद के तत्ववाधान में आयोजित श्रमण भगवान महावीर स्वामी के 2624वें जन्मकल्याणक महोत्सव पर होने वाले 13 दिवसीय आयोजनों की श्रृंखला में शनिवार को भारतीय लोक कला मण्डल में जीतो उदयपुर चेप्टर द्वारा वण्डर सीमेन्ट के प्रायोजन में विराट हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। महावीर जैन परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने समग्र जैन समाज को 13 दिवसीय आयोजनों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने का आव्हान किया।
जीतो उदयपुर चेप्टर के अध्यक्ष यशवंत आंचलिया ने विशाल जन मैदिनी का शब्दों द्वारा स्वागत करते हुए 9 अप्रेल को विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर विद्या निकेतन प्रांगण में होने वाले आयोजन में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आव्हान किया।
लोक कला मण्डल में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों के मुख से निकली हास्य रचनाओं ने आयोजन स्थल पर हास्य की फुहारों की बरसात कर दी। हजारों की संख्या में मौजूद श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया व सभी श्रोता देर रात तक लोक कला मण्डल परिसर में डटे रहे।
कवि सम्मेलन की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद अपनी नई दिल्ली से आई कवयित्री खुशबू शर्मा ने अपने अपनी सुरीली आवाज के श्रंृग़ार रस से काव्यपाठ करते हुए कहा कि सोने और चाँदी के गहने भी नहीं देखती मैं... इस क़दर क़ीमती कपड़े भी नहीं देखती मैं...अपने माँ बाप की आँखों से उड़ा दूँ नींदें....इतने उलझे हुए सपने भी नहीं देखती मैं...।
सभी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले हास्य कवि दीपक पारीक ने अपने काव्यपाठ में कहा कि सोचते हैं सब, मेहरबानी से जिन्दा है।, इस ज़मीं पे वो हवा पानी से जिन्दा है, भटकता रहता हमेशा चाँद तारों में, कौन-सा फनक़ार आसानी से जिन्दा है.. पर श्रोताओं की हंसी के फव्वारें छूट गये। उन्होंने अपनी टिप्पणियों से देर तक खूब हंसाया एवं गुदगुदाया।
शरगढ़ के कवि राजकुमार बादल ने खुद के हाथां लगा, आग मत लाडली। अपणां कु के लगा दाग मत लाडली..., कतरा टुकड़ा मे कटकट के बंट जावसी, बणठण डोली में जा भाग मत लाडली...।
ग्वालियर से आए व्यंग्य कार तेज नारायण शर्मा ने अपने काव्यपाठ में कहां कि सडक़ रास्ते ज़ाम कराकर..., जल्वा अपने नाम कराकर..., सभी मसीहा लौट चुके हैं, शहर में क़त्ले-आम कराकर...। मंच जबसे अर्थदायक हो गए..., तोतले भी गीत गायक हो गए.., राजनैतिक मूल्य कुछ ऐसे गिरे, ज़ेबकतरे तक विधायक हो गए..., युग की टेर लिए बैठी है..., मन के फेर लिए बैठी है..., रघुनंदन अब तो आ जाओ..., शबरी बेर लिए बैठी है।
राणा सांगा पर टिप्पणी करने वाले सांसद को जवाब देते हुए उदयपुर के कवि राव अजातशत्रु ने कहा "मेवाड़ी पानी ने न कभी समझौतों को अपनाया है, मेवाड़ी पानी ने न कभी दिल्ली को शीश झुकाया है, मेवाड़ी पानी ने तो सदा जंगल जंगल ठोकर खाई .., मेवाड़ी पानी को न कभी दरबारों की चौखट भाई, अरे घास की रोटी अमर सिंह को लगती पकवान सी..., धरती मेवाड़ महान की है, राणा सांगा के मान की है, ये गौरव की पहचान की है, ये अपने स्वाभिमान की है,.. पर श्रोताओं ने तालियों की दाद से उनकी रचना का भरपूर समर्थन किया।
मुम्बई से द ग्रेट इण्डियन लाफ्टर चैलेंज के कॉमेडियन सुरेश अलबेला ने हास्य काव्यपाठ में कहा कि रात नशीली कर डाली उसके हाथों की प्याली ने...जादू वादू कर डाला है लडक़ी भोली भाली ने..., कई धुरंधर धर्म युद्ध में धनुष तोडऩे आए थे...., सारा मज़मा लूट लिया है नीली आंखों वाली ने...पर वाह वाह की नजाकत मिली।
तेज ओजस्वी कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपने काव्यपाठ से लोक कला मण्डल में बैठे हजारों की संख्या में श्राताओं के मन में जोश भर दिया। उन्होने अपने काव्यपाठ पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे में कहा कि हर संकट का हल मत पूछो...., आसमान के तारों से सूरज किरणें नहीं मांगता नभ के चाँद-सितारों से, सत्य कलम की शक्ति पीठ है राजधर्म पर बोलेगी वर्तमान के अपराधों को समयतुला पर तोलेगी..., पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे इतिहासों के पन्नों में वे सब कायर कहलायेंगे..., बंदूकों की गोली का उत्तर सद्भाव नहीं होता हत्यारों के लिए अहिंसा का प्रस्ताव नहीं होता..., ये युद्धों का परम सत्य है सारा जगत जानता है लोहा और लहू जब लड़ते हैं तो लहू हारता है,जो खूनी दंशों को सहने वाला राजवंश होगा या तो परम मूर्ख होगा या कोई परमहंस होगा...., आतंकों से लडऩे के संकल्प कड़े करने होंगे। हत्यारे हाथों से अपने हाथ बड़े करने होंगे।
उन्होंने अपनी दूसरी रचना हमको अब भी दुनिया का भूगोल बदलना आता है में कहा कि हम दो आँसू नहीं गिरा पाते अनहोनी घटना पर पल दो पल चर्चा होती है बहुत बड़ी दुर्घटना पर..., इसीलिये नाकाम रही हैं कोशिश सभी उजालों की क्योंकि ये सब कठपुतली हैं रावलपिंडी वालों की..., अंतिम एक चुनौती दे दो सीमा पर पड़ोसी को गीदड़ कायरता ना समझे सिंहो की ख़ामोशी को.., हमको अपने खट्टे-मीठे बोल बदलना आता है। हमको अब भी दुनिया का भूगोल बदलना आता है।
अपनी तीसरी रचना में कहां कि पूरी बन्दर बाट हो गयी है दुनिया सोलह दूनी आठ हो गयी है दुनिया हथियारों की होड़ हो गयी है दुनिया गुण्डों का गठजोड़ हो गयी दुनिया....मैं दुनिया को भगवत गीता ज्ञान सिखाता-फिरता हूँ अग्निवंश के चारण कुल का मान बढ़ाता-फिरता हूँ..। कवि सम्मेलन का सफल संचालन देश के जाने माने और उदयपुर के लाडले कवि अजातशत्रु ने किया।
जीतो के मुख्य सचिव अभिषेक संचेती एवं जीतो लेडिज विंग अध्यक्षा अंजलि सुराणा ने बताया कि देशभर से आए सभी अन्तराष्ट्रीय कवियों का मेवाड़ परम्परा से स्वागत अभिनंदन किया गया। आभार कवि सम्मेलन संयोजक श्याम नागोरी द्वारा ज्ञापित किया गया।
समारोह में अतिथि के रूप में शहर विधायक ताराचंद जैन, वण्डर सीमेन्ट के परमानंद पाटीदार, दिलीप तलेसरा, निर्मल जैन, आईजी राजेश मीणा थे।
राजकुमार फत्तावत, यशवंत आंचलिया, अभिषेक संचेती, श्याम नागौरी, अंजली सुराणा, दिव्यद दोशी, उपाध्यक्ष नितुल चंडालिया, सचिव सुधीर चित्तौड़ा, यशवंत कोठारी आदि े पदाधिकारियों ने सभी कवियों डॉ. हरिओम पंवार, सुरेश अलबेला, तेज नारायण बैचेन, खुशबू शर्मा, राजकुमार बादल, दीपक पारीख एवं राव अजातशत्रु को सम्मानित किया गया।