अहंकार का धनुष टूटता है तभी सीता रूपी भक्ति वरमाला डालती है : महाराज

Update: 2025-10-10 13:35 GMT

 

उदयपुर । हिरण मगरी सेक्टर 14 स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण जेके ब्लॉक में संगीतमय रामकथा के आठवें दिन विविधि प्रंसगों का श्रवण करवाया। कथा में पुष्कर दास महाराज ने कहा हमने किसी जन्म में कोई पुण्य किए है तभी आज प्रभु ने संतों का संग, और कथा सत्संग में बैठने का अवसर दिया। गुरु ज्ञान का दीपक ह्रदय में जलाना पड़ता है, सही ज्ञान का प्रकाश तो हमारे भीतर होना चाहिए। सत्संग रूपी ज्ञान गंगा तो बह रही है इसमें जो डुबकी लगा ले उसका जीवन सफल हो जाता है । जहां भक्ति होगी ईश्वर पीछे पीछे आता है, भगवान कृष्ण ने जो कहा और राम ने जो किया वो हमे पालन करना चाहिए। आगे राम विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा राम ने अहंकार रूपी धनुष को तोड़ा तभी भक्ति रूपी सीता ने वरमाला डाली। राम,कृष्ण दोनों को अपने जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ा , महाराज ने कहा रामायण में राम और भरत का प्रेम था उसी तरह घर घर के प्रेम का वातावरण होना चाहिए।

रामायण में सीताजी के पिता राजा जनक और माता सुनैना ने बेटी को सिख दी सबसे पहले सास, ससुर ओर गुरु की सेवा करना। राम को 14 वर्ष का वनवास होने के कारण सीता जी ने भी राम के साथ वनवास काटने की इच्छा रखी। राम जी के मना करने के बाद भी सीता जी नहीं मानी बोली जहां मेरे पति परमेश्वर में वही सुख, दुख में साथ रहूंगी । राजा जनक चाहते तो बेटी सीता ओर राम के लिए वनवास में सुख के इंतजाम कर सकते थे परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। बेटी को यही सिख दी सुख हो या दुख हर इंसान को भोगना है।

कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज ने कहा वनवास में राम ओर सीता को कई दुखों का सामना करना पड़ा। ईश्वर होकर भी उन्हें सब सहन करना पड़ा तो हम जैसे जीवों को भी सहन करना पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं है । मनुष्य चाहे तो हर समय प्रभु का सुमिरन कर सकता है। महाराज ने कहा राम अयोध्या में आए तो सुख की बारिश ज्यादा हुई तो भगवान ने सोचा अब थोड़ी धूप की जरूरत है और निमित्त कैकई, मंथरा बनी और प्रभु को 14 वर्ष का वनवास हुआ द्य केवट ने भी प्रभु राम के चरण धोए तो उसके भी मन की दुख, दोष, दरिद्रता, जलन मिट गई।

विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि शुक्रवार को कथा में अतिथि सूर्य प्रकाश  माली, निलेश जैन, लोकेश जोशी, मनोहर सिंह राठौड़, बबीला लोरेस, लीला कुंवर उपस्थित रहे । अंत में रुद्रेश्वर महादेव विकास समिति के संरक्षक महेश त्रिवेदी ने बताया 9 दिवसीय रामकथा की पूर्णाहुति शनिवार दोपहर 2 से 5 बजे मध्य महाआरती के साथ होगी ।

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