पंडित वैष्णव और नादरूप ने दी उत्कृष्ट प्रस्तुतियां
उदयपुर, । पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर की ओर से तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ उत्सव का आगाज शुक्रवार को एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ मुक्ताकाशी रंगमंच शिल्पग्राम में हुआ। इस अवसर पर प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित राजेंद्र वैष्णव ने राग बसंत में शास्त्रीय गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी सुरीली आवाज और राग बसंत की मधुरता ने वसंत के आगमन को एक संगीतमय अहसास से भर दिया।
वहीं, इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथक गुरू शमा भाटे के नृत्यांगना ग्रुप नादरूप पुणे ने भी अपनी कला का जादू बिखेरा। उन्होंने राग बसंत के स्वरों पर आधारित एक बेहतरीन नृत्य प्रस्तुति दी, जिसमें उनकी नृत्य मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों का दिल जीत लिया। शिल्पग्राम का माहौल वसंत की ताजगी और कला के रंगों से सराबोर हो उठा। यह आयोजन स्थानीय कला प्रेमियों और संस्कृति के संरक्षकों के लिए एक यादगार पल बन गया। ‘ऋतु वसंत’ के पहले दिन पंडित राजेंद्र वैष्णव और शमा भाटे के नृत्यांगना ग्रुप नादरूप पुणे की प्रस्तुति वसंत ऋतु के स्वागत में एक अनूठा संगम साबित हुई।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से पारंपरिक कला और संगीत को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में डॉ. प्रेम भण्डारी, डॉ. पामिल मोदी सहित शहर के कलाप्रेमी उपस्थित थे।
फगवा बृज में देखन को चलो री, फगवे में मिलेंगे कुंवर कान्ह से
पंडित राजेंद्र वैष्णव ने फगवा बृज में देखन को चलो री, फगवे में मिलेंगे कुंवर कान्ह से राग बसंत से शुरूआत की। इसमें मध्यलय में तीन ताल की बंदिश गाई। गायन में सखियों के साथ बृज की होली देखने की उमंग और कृष्ण के दर्शन करने की इच्छा भी प्रकट हुई। इसके साथ ही राग बसंत में फुलवा बिनत डार डार, गोकुल के सब कुम्हार चन्द्रवदन चमक बदिर बंदिश प्रस्तुति की। उनके साथ हारमोनियम पर अनुपराज पुरोहित, तबले पर मास्टर कपिल वैष्णव, तानपुरे पर डिम्पी सुहालका एवं विशाल राठौड़ ने अच्छी संगत की।
नादरूप पुणे ने बसंत राग में तराना प्रस्तुत कर बिखेरी कथक की छटा
प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और कोरियोग्राफर शमा भाटे के नेतृत्व में उनके नृत्यांगना ग्रुप नादरूप ने राग बसंत के मधुर स्वरों पर आधारित एक मनमोहक तराना प्रस्तुत किया, जिसने वसंत ऋतु की ताजगी और शास्त्रीय नृत्य की गहराई को जीवंत कर दिया।
राग बसंत, जो वसंत ऋतु का प्रतीक माना जाता है, के स्वरों पर आधारित इस तराने में नर्तकियों ने अपने हस्त संचालन, पैरों की थिरकन और अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रस्तुति पारंपरिक शास्त्रीय कला और समकालीन कोरियोग्राफी का एक अनूठा संगम थी, जो शमा भाटे की रचनात्मक प्रतिभा को उजागर करती है।
कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों ने नादरूप की विभिन्न प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। शमा भाटे ने बताया कि इस तराने को तैयार करने में उनके ग्रुप ने राग बसंत के भाव को कथक की मुद्राओं के साथ जोड़ने का विशेष प्रयास किया, ताकि वसंत की उल्लासमयी भावना को दर्शाया जा सके। यह प्रस्तुति न केवल एक नृत्य थी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा का उत्सव भी थी।
इसके साथ ही नादरूप ने होली के रंगों और भाव को कथक की पारंपरिक शैली में पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रस्तुति वसंत और होली के उत्सव का एक सुंदर चित्रण थी, जिसने शास्त्रीय नृत्य की गहराई को जीवंत किया।
शमा भाटे ने अपनी कोरियोग्राफी के माध्यम से होरी के पारंपरिक राग और ताल को नादरूप की नृत्यांगनाओं के साथ मंच पर उतारा। इस प्रस्तुति में कथक के तत्कार, चक्कर और भावपूर्ण अभिनय का बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला। होरी, जो राधा-कृष्ण के प्रेम और होली के उल्लास से जुड़ी रचना है, को नृत्यांगनाओं ने अपनी मुद्राओं और लयबद्ध गतियों से जीवंत कर दिया। इसके साथ ही भैरवी चतुरंग की प्रस्तुति दी, जिसमें तराना, साहित्य, संगम, नृत्य के बोलों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। यह प्रस्तुति गिरीजा देवी, पंडित अभिषेक, सुरेश पल्ल्वकर की रचना पर थी। दशावातार के साथ प्रस्तुतियों का समापन हुआ। कोरियाग्राफी गुरू शमा भाटे, संगीत नरेन्द्र भिड़े एवं केदार पंडित, लाइट्स का संयोजन अनूप जोशी ने किया। सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मोहिता दीक्षित ने किया।
आज प्रवीण गांवकर तथा अमित गंगानी की प्रस्तुति
शनिवार को डॉ. प्रवीण गांवकर गोवा के प्रतिष्ठित हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक, शिक्षाविद् और सांस्कृतिक आयोजक हैं। उन्होंने आगरा और जयपुर घरानों की समृद्ध परंपराओं में शिक्षा प्राप्त की और पंडित अजय चक्रवर्ती व पंडित सत्यशील देशपांडे जैसे महान गुरुओं से मार्गदर्शन लिया। ठुमरी, दादरा, अभंग और नाट्य संगीत में उनकी विशेष दक्षता है।
अमित गंगानी जयपुर घराने के प्रसिद्ध कथक कलाकार है। उन्होंने उनके चाचा प्रेमशंकर गंगानी एवं बृजमोहन गंगानी ने कथक की तालीम हासिल की। वे देश के विभिन्न प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुके है।