राजस्थान में फागण की बयार: चंग की थाप और लोकगीतों से महका शेखावाटी, डूमरा के विद्यालय में मना उत्सव

Update: 2026-02-28 16:50 GMT

नवलगढ़ (झुंझुनूं) | राजस्थान की रेतीली धरती पर इन दिनों फागण की अनूठी रंगत छाई हुई है। ढोल-नगाड़ों की थाप, चंग की गूँज और लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों के साथ रंगों की बौछारें समूचे माहौल को उत्सवमय बना रही हैं। फाल्गुन मास की शुरुआत के साथ ही विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र के गांव-गांव और शहरों में पारंपरिक उल्लास चरम पर है।

शेखावाटी में गूँजी चंग की थाप और फाग गीत

फागण के आगमन के साथ ही झुंझुनूं और सीकर के ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक गैर नृत्य और चंग के साथ फाग गीतों का दौर शुरू हो गया है।

सांस्कृतिक विरासत: युवा, बुजुर्ग और पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चे रंग-गुलाल के साथ होली के गीतों पर थिरकते नजर आ रहे हैं।

पीढ़ियों का संगम: बुजुर्ग अपनी पुरानी लोक परंपराओं और गीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में जुटे हैं, जिससे यह उत्सव सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का माध्यम बन गया है।

डूमरा के SBVM विद्यालय में फागण महोत्सव

इसी कड़ी में नवलगढ़ तहसील के डूमरा गांव स्थित SBVM विद्यालय में फागण का विशेष आयोजन किया गया।

प्रेरणा: विद्यालय के डायरेक्टर एवं शिक्षाविद् राम गोपाल जांगिड़ ने विद्यार्थियों और सहयोगी स्टाफ को इस पारंपरिक आयोजन के लिए प्रेरित किया।

संदेश: उन्होंने कहा कि फागण केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश है।

खुशियाँ: कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे विद्यालय परिसर खुशियों के रंगों से सराबोर हो गया। हमारे साथी अध्यापक अजय जी ने यह जानकारी साझा की।

Similar News

जिओ के टैंकर में 'पानी' जैसा केमिकल मिलावट के 'काले खेल' का पर्दाफाश;: हाईवे की होटल पर दबिश, 80 ड्रम केमिकल जब्त