जाल का खेड़ा: विकास की बेड़ियों में कैद एक गांव: स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र अधूरा, सड़कें टूटी – 75 वर्षों के बाद भी नहीं दिखा विकास

By :  naresh
Update: 2025-09-03 09:49 GMT

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शाहपुरा (राजेंद्र खटीक) : आजादी के 75 वर्षों बाद भी जाल का खेड़ा राजगढ़ गाँव विकास कार्यों से वंचित है। पिछले दो-तीन वर्षों में गांव के कुछ लोग राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए हैं और उनमें व्यक्तिगत स्तर पर थोड़ी प्रगति दिखी है, लेकिन गांव का सामूहिक विकास मुख्य धारा से आज भी दूर है।

गांव में भारी बारिश के समय पानी का निकासी प्रणाली पूरी तरह से विफल रहती है। आसपास का सारा पानी गांव से होकर गुजरता है, लेकिन उसका उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण मुख्य मार्ग बार-बार जलमग्न हो जाता है। इसके अलावा, लगभग एक दर्जन घरों में घर की नींव तक पानी पहुँच जाता है, जिससे जनहानि का खतरा बना रहता है।

जाल का खेड़ा लगभग 1200 से 1500 लोगों की आबादी वाला गांव है। बावजूद इसके, यहां के आधारभूत ढांचे अभी भी अधूरे हैं। विद्यालय और उपस्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह से स्थापित नहीं हैं। शमशान घाट का निर्माण अधूरा है, पेयजल आपूर्ति व्यवस्थित नहीं है और मुख्य मार्ग पर सड़कें टूटी हुई हैं। अंग्रेजी बबूल के अतिक्रमण और सड़क निर्माण में देरी जैसी समस्याएं गांववासियों के लिए रोजमर्रा की चुनौती बन गई हैं।

स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्षों से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन अभी भी विकास के नाम पर केवल वादे ही रह गए हैं। जल निकासी, सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसे मूलभूत ढांचे गांव के निवासियों की दैनिक जरूरतें हैं, और इनकी कमी से उनकी जिंदगी पर गहरा असर पड़ता है।

जाल का खेड़ा आज भी विकास की बेड़ियों में कैद है और यहां के लोगों की आशा है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाए। अगर समय रहते यह जरूरी सुधार नहीं हुए, तो न केवल जनजीवन प्रभावित होगा बल्कि भविष्य में बड़े संकट का खतरा भी बन सकता है।

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