60 हजार शिक्षकों की नौकरी पर 'TET' की तलवार:: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धुकधुकी, 2 साल में परीक्षा पास करने की डेडलाइन
भीलवाड़ा। राजस्थान के करीब 60 हजार ग्रेड थर्ड शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश ने उन शिक्षकों के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET/REET) को अनिवार्य कर दिया है, जिनकी नियुक्ति साल 2010 से पहले हुई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवा जारी रखने या पदोन्नति पाने के लिए इन अनुभवी शिक्षकों को भी अगले दो साल के भीतर यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) की मूल भावना को दोहराते हुए कहा है कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य है।
अनिवार्यता: सभी कार्यरत शिक्षकों को 2 साल के भीतर टेट पास करना होगा।
छूट: केवल उन्हीं शिक्षकों को राहत दी गई है जिनकी सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 वर्ष से कम का समय बचा है।
खतरा: परीक्षा पास न करने की स्थिति में शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा सकती है।
राजस्थान में 60 हजार 'गुरुजी' प्रभावित
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में लेवल-1 और लेवल-2 के करीब 2.30 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।
1.70 लाख सुरक्षित: ये वे शिक्षक हैं जो 2011 के बाद रीट (REET) के आधार पर भर्ती हुए हैं।
60 हजार पर संकट: ये शिक्षक 2010 से पहले नियुक्त हुए थे, जब प्रदेश में टेट लागू नहीं था। अब उम्र के इस पड़ाव पर दोबारा किताब उठाना और प्रतियोगी परीक्षा पास करना इनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
विरोध की गूँज: 5 फरवरी को 'संसद कूच' की तैयारी
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
संघर्ष समिति का गठन: देश के 14 शिक्षक संगठनों ने मिलकर 'अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति' बनाई है।
संसद कूच: 5 फरवरी को देशभर के शिक्षक दिल्ली में संसद का घेराव करेंगे।
पुनर्विचार याचिका: STFI की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) भी दाखिल की गई है।इतिहास: कब शुरू हुआ टेट का सफर?
2009: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू हुआ।
23 अगस्त 2010: देशभर में शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य की गई।
2011: पहली बार सीटेट (CTET) और राजस्थान में रीट (REET) आयोजित हुई।
"दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों से अब पात्रता परीक्षा की उम्मीद करना उनके अनुभव का अपमान है। हम इस फैसले के खिलाफ कानूनी और जमीनी दोनों लड़ाई लड़ेंगे।" — शिक्षक संगठन प्रतिनिधि
