रामस्नेही संप्रदाय में ‘युवाचार्य’ पद की कोई व्यवस्था नहीं, आचार्य ने दिया स्पष्ट बयान
शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्यश्री स्वामी रामदयालजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि संप्रदाय में युवाचार्य नाम का कोई पद नहीं है और न ही ऐसी कोई व्यवस्था कभी रही है। उन्होंने यह बयान एक समाचार पत्र में चित्तौड़गढ़ के युवा संत दिग्विजयराम महाराज को युवाचार्य अंकित किए जाने के संदर्भ में दिया।
आचार्यश्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी संत युवा हो सकता है, लेकिन युवाचार्य नहीं। संप्रदाय की स्थापना से लेकर आज तक युवाचार्य की कोई परंपरा नहीं रही है। रामस्नेही संप्रदाय में केवल आचार्य का निर्वाचन होता आया है और यही परंपरा आज भी कायम है।
उन्होंने कहा कि परंपराओं और शास्त्रीय मर्यादाओं के विपरीत किसी भी प्रकार की नई उपाधि गढ़ना संप्रदाय की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। इसी क्रम में आचार्यश्री ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की कि रामस्नेही संप्रदाय में युवाचार्य नाम का कोई पद नहीं है और भविष्य में भी ऐसी किसी व्यवस्था की कोई संभावना नहीं है।
आचार्यश्री के इस स्पष्ट वक्तव्य के बाद संप्रदाय से जुड़े अनुयायियों और संत समाज में स्थिति साफ हो गई है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि संप्रदाय की परंपराओं, मर्यादाओं और स्थापित व्यवस्था का सम्मान किया जाए तथा किसी भी प्रकार के भ्रम से बचा जाए।