तबादला निरस्त नहीं हुआ तो टीसी कटवाने की चेतावनी, नंदराय में शिक्षा और संवेदना की लड़ाई और तेज

Update: 2026-01-14 07:41 GMT

शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। भीलवाड़ा जिले के नंदराय कस्बे में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं का आंदोलन आज तीसरे दिन भी थमा नहीं। रामचरितमानस की चैपाई “विनय न मानत जलधि जड़ गए, तीन दिन बीति बोले राम” इन बच्चों के संघर्ष पर सटीक बैठती नजर आ रही है। पहले दिन विनय, दूसरे दिन प्रतीक्षा और अब तीसरे दिन आक्रोश के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं।

विद्यालय में कार्यरत भूगोल व्याख्याता शंकरलाल जाट के तबादले से आहत छात्र-छात्राएं लगातार शिक्षा विभाग और प्रशासन से तबादला निरस्त कर पुनः नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद न तो जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से कोई आश्वासन मिला और न ही कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा। इससे बच्चों का धैर्य जवाब देने लगा है।

तीसरे दिन आंदोलन ने और गंभीर मोड़ ले लिया। छात्रों ने ऐलान किया कि यदि उनके प्रिय शिक्षक का तबादला निरस्त नहीं किया गया, तो वे विद्यालय से टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) कटवाने को मजबूर होंगे। इस चेतावनी ने पूरे शिक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। छात्रों का कहना है कि जिस शिक्षक ने उन्हें सिर्फ पढ़ाया नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दी, उसके बिना वे इस विद्यालय में नहीं पढ़ेंगे।

इस बीच विद्यालय की कार्यवाहक प्रिंसिपल पूजा वर्मा और व्याख्याता रामप्रकाश तेली ने प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि यदि छात्र टीसी कटवाने की बात कर रहे हैं, तो वे अपने-अपने अभिभावकों को साथ लेकर विद्यालय आएं, ताकि परिजनों को भी स्थिति से अवगत कराया जा सके और आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सके।

छात्रा यामिनी कुमारी तेली ने भावुक स्वर में कहा कि शंकरलाल जाट ऐसे शिक्षक हैं, जो बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। “यदि हमारे प्रिय शिक्षक का तबादला निरस्त नहीं हुआ, तो हम सभी छात्र सामूहिक रूप से टीसी कटवाएंगे,” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा।

तीसरे दिन भी समाधान न निकलने से छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को विद्यालय भवन के मुख्य द्वार पर आंदोलनरत छात्र-छात्राएं सामूहिक रूप से टीसी कटवाने का प्रार्थना पत्र देने की तैयारी के साथ पहुंचे।

पिछले सात वर्षों से नंदराय स्कूल में सेवाएं दे रहे शंकरलाल जाट ने शिक्षा को सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्चों के सपनों को उड़ान दी। यही कारण है कि आज बच्चे उनके तबादले को अपने भविष्य से जुड़ा सवाल मानकर ठंड की परवाह किए बिना संघर्ष कर रहे हैं।

धरने पर बैठे छात्रों का कहना था कि वे सोमवार से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जब तक शंकरलाल जाट का ट्रांसफर निरस्त नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आमरण अनशन जैसा कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह आंदोलन अब केवल एक तबादले का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा, संवेदना और गुरु-शिष्य संबंधों की रक्षा की लड़ाई बन चुका है।

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