बोले भीलवाड़ा : आवारा कुत्तों के खौफ से दहशत में जिंदगी, बहुत दर्द झेला है...', सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोले कुत्तों के हमलों के शिकार लोग.....

⇐ लोग अपनी पीड़ा को जाहिर कर रहे हैं सोशल मीडिया पर
⇐ महापौर बचते रहे जवाब देने से
⇐ भगवान न करे उनको या उनके परिवार को.....
भीलवाड़ा हलचल आवारा कुत्तों के आतंक से वस्त्र नगरी के लोग दुखी हैं। अस्पतालों में कुत्ता काटने के मरीजों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस हद तक लोग पीड़ित हैं। अस्पताल में कुत्ते के काटने के रोज मरीज रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए जाते हैं। पिछले एक माह में ही कुत्ते के काटने की 50 केस दर्ज हुए हैं।

कुत्तों के आतंक पर आए सुप्रीम कोर्ट है राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को भीलवाड़ा के लोग सराहनीय बता रहे हैं। लोगों का कहना है हर एक क्षेत्र में आए दिन कोई न कोई व्यक्ति कुत्तों का शिकार हो रहा है। दो पहिया वाहन चालकों व राहगीरों पर झूंड बनाए हुए कुत्ते झपट जाते हैं।केकिने नाराजगी इस बात की हे की कोर्ट को ें मामलो में दखल देनी पड रही हे लेकिन जिम्मेदार नगर निगम खाना पूर्ति करने में लगा हे अभियान के नाम पर फोरि कार्यवाही एक दो दिन कर के फिर हाथ बाँध लिए जाते हे
लोग अपनी पीड़ा को सोशल मीडिया पर भी जाहिर कर रहे हैं। कुत्ते के हमले में घायल लोगों ने कहा कि उन्होंने जो दर्द सहा है वह शब्दों में बयां नहीं कर सकते। कुत्तों के समाधान के लिए निगम को शिकायतें करके थक चुके थे। कोर्ट के आदेश ने राह दिखाई है कि इस समस्या से लोगों को छुटकारा मिलेगा।
क्या बोले पीड़ित?
वो दिन मैं भूल नहीं सकता जब सड़क पर कुत्ते ने मुझे भयंकर तरीके से काटा था। रेबीज के कई इंजेक्शन मुझे लगे थे। डर लगता था कोई इंजेक्शन अगर छुट गया तो उसके क्या परिणाम होंगे। दिमाग में एक ही बात रहती थी कौन-कौन से दिन इंजेक्शन लगवाने हैं। बहुत दर्द सहा है। कोर्ट का फैसला बहुत अच्छा है। -अजय,
मैं गली से किराने का सामान लेकर जा रहा था। अचानक से कुत्ते ने मेरे ऊपर हमला कर दिया। मेरे हाथ पर सात से आठ जगह कुत्ते ने काटा था। कई दिनों तक वह फैक्ट्री में काम पर नहीं जा सका था। रेबीज के इंजेक्शन के लिए अस्पतालों के धक्के खाए हैं। सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन होते नहीं थे। जेब में इतने पैसे नहीं थे निजी अस्पताल में लगवा सकूं। - राकेश 100 फिट रोड
मेरे मासूम बेटे को कुत्ते ने बुरी तरह पिछले दिनों १०० फिट रोड पर काटा तो उसे देखे कर में कई दिनों तक रोई उसका दर्र्द मुझेस सहने नहीं होता था , उसने आक्रोश में कहा की नगर निगम के लोग एक दिन आकर कुत्ते पकड़े कर दिखा करे चले गए अब भी वही हालात हे कुत्ते एक नहीं इनके हे झुंड में घूमते हे लोगो के पीछे दोडते हे मगर निगम के जिम्मेदार लोगो को क्या फर्क पड़ता हे गरीबो के दर्द का.... ,भगवान न करे उनको या उनके परिवार को कभी ऐसे हादसे का सामना करना पड़े तब उन्हें दर्द का पता चले
गा की उनके जिगर के टुकड़े का कितना दर्द होता हे ...! एक पीड़िता का दर्द
आवारा कुत्तों को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
सड़क वाले डॉग्स यानी आवारा कुत्तों को लेकर एक बड़ा आदेश दिया. राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों को सभी आवारा कुत्तों को सड़क से हटाने के काम पर लगा दिया है और इस आदेश के बाद सोशल मीडिया पर हमारे देश के लोग दो वर्गों में बंट गए हैं. पुश प्रेमियों का कहना है कि ये फैसला आवारा कुत्तों के प्रति क्रूरता है. लेकिन आवारा कुत्तों का शिकार बने लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं. सबसे पहले तो ये जानने की जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर क्या निर्देश दिए हैं और इसकी जरूरत क्यों पड़ी? सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों, रेबीज़ के बढ़ते मामलों और उनसे होने वाली मौतों की वजह से 28 जुलाई को इसका स्वत: संज्ञान लिया था.
कोर्ट ने कहा सभी आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा
कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा है कि सड़क पर घूमने वाले सभी आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए, उनकी नसबंदी की जाए और फिर उन्हें डॉग शेल्टर्स में रखा जाए. इसके लिए अधिकारियों को वक्त दिया गया है. इस दौरान स्थानीय नगर निगमों को डॉग शेल्टर्स भी बनाने होंगे और उनमें आवारा कुत्तों को रखना होगा. कोर्ट ने ये भी कहा कि हर दिन आवारा कुत्तों को पकड़ने का रिकॉर्ड मेंटेन किया जाए और कोई भी आवारा कुत्ता दोबारा सड़क पर ना छोड़ा जाए. कोर्ट ने स्थानीय निकायों से कहा है कि आवारा कुत्तों की शिकायत मिलने पर कार्रवाई होनी चाहिए.
आवारा कुत्तों से मुक्त बनाने का अभियान छेड़ने के लिए कहा है. अब सवाल ये है कि कोर्ट ने अचानक सुनवाई करके आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश क्यों दिए. दरअसल पिछले कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों में बढ़ते हमलों और रैबीज से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. पिछले साल यानी साल 2024 में कुत्तों के काटने के 37 लाख 17 हजार 336 मामले सामने आए थे. इस मामलों में 54 लोगों की रेबीज की वजह से मौत हो गई थी.
दर्द वाली सुई ,कुत्ते ने काटा तो लगानी पड़ेगी
इसी साल जनवरी में ही कुत्तों के काटने के 4 लाख 29 हजार मामले सामने आए हैं. राज्यों के हिसाब से देखें तो जनवरी में सबसे ज्यादा करीब 56 हजार मामले महाराष्ट्र में हुए, इसके बाद गुजरात में करीब 54 हजार, तमिलनाडु में करीब 49 हजार, कर्नाटक में 39 हजार और बिहार में करीब 34 हजार सामने आए हैं. इस लिस्ट में और भी राज्य हैं. कुत्तों के काटने के मामले इसलिए बढ़े हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों की संख्या भी बहुत तेजी से बढ़ी है. कुत्तों की संख्या को लेकर पिछली आधिकारिक गणना साल 2019 में हुई थी.
आवारा कुत्तों की संख्या के मामले में राजस्थान टॉप 5 राज्यों में
साल 2019 में पशुपालन मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में कुल 1 करोड़ 53 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं. आवारा कुत्तों की संख्या के मामले में टॉप 5 राज्यों में यूपी, ओडिशा, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक आते हैं. यूपी में तब सबसे ज्यादा 20 लाख 60 हजार के ज्यादा आवारा कुत्ते बताए गए थे. साल 2024 में आई The State Of Pet Homelessness Report के मुताबिक भारत में आवारा कुत्तों की संख्या 6 करोड़ 5 लाख बताई गई थी. अगर हम भीलवाड़ा की बात करे तो - तो एक अनुमान के मुताबिक यहां करीब हजारो की सख्या में आवारा कुत्ते हैं. जिनका निगम के पास भी कोइ पुख्ता रिकार्ड नहीं हे
कुत्ते झुंड में
ऐसे हे सडको के हालात
भीलवाड़ा में शायद ही कोई इलाका ऐसा होगा जहा कुत्तो के झुण्ड न हो और सड़क पर चलते वाहनों पर भोकते हुए न पीछे ने रपटे हो, ऐसे में आये दिन आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से उनके हमले भी बढ़ गए है. कई हमलों में शिकार छोटे बच्चे होते हैं, जो इनसे बचने में नाकाम रहते हैं. कुत्तों के काटने के मामलों में सबसे बड़ा खतरा रेबीज का रहता है, जो एक जानलेवा वायरस है. .
महापौर बचते रहे जवाब देने से
राकेश पाठक
महापौर
इस संबद्न्ध में निगम महापौर राकेश पाठक से बात करनी चाहि मगर उनका मोबाइल बीजी या नो रिप्लाई मिला यानी वो जवाब देने से बचते रहे हे .


