कन्हैयालाल हत्याकांड पर अशोक गहलोत का अमित शाह पर तीखा हमला: 'भाजपा कार्यकर्ता थे हत्यारे, इसीलिए नहीं होने दे रहे सजा'
जयपुर/उदयपुर। उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर राजस्थान की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। गहलोत ने दावा किया कि कन्हैयालाल के हत्यारे भाजपा के कार्यकर्ता थे, इसीलिए सरकार उन्हें सजा दिलाने में देरी कर रही है।
गहलोत का सवाल: सवा दो साल में क्यों नहीं बनी विशेष अदालत?
पूर्व सीएम गहलोत ने बुधवार शाम 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर कन्हैयालाल के बेटे यश के एक भावुक पोस्ट को टैग करते हुए भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। गहलोत ने लिखा कि विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह ने जनता के बीच यह भ्रम फैलाया था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विशेष अदालत का गठन नहीं किया, जबकि यह मामला शुरू से ही एनआईए (NIA) के अधीन है।
गहलोत ने सीधे तौर पर घेराव करते हुए पूछा—
"भाजपा की राजस्थान में सरकार बने सवा दो साल हो चुके हैं। आपकी सरकार ने अभी तक इस मामले में वह विशेष अदालत क्यों नहीं बनाई, जिसका आरोप आप कांग्रेस पर लगा रहे थे? भाजपा ने इस मामले पर केवल राजनीति की है।"
एनआईए की सुस्त कार्रवाई पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने एनआईए की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार वास्तव में न्याय चाहती, तो इस मुकदमे की रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई करवाती। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक एनआईए 160 गवाहों में से केवल 40 की गवाही ही करवा पाई है। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा इतने संगीन मामले में अपराधियों को सजा दिलाने में पूरी तरह विफल रही है।
बेटे यश की मार्मिक अपील: 'फांसी हो तो विसर्जित करूँ पिता की अस्थियाँ'
इससे पहले 31 मार्च को कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने एक वीडियो पोस्ट कर केंद्र और राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई थी। यश ने अमित शाह के पुराने बयान को याद दिलाते हुए कहा कि अगर विशेष अदालत बनाना राज्य सरकार का काम है, तो अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ? यश ने भावुक होते हुए कहा कि जब तक उन आतंकवादियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती, जिन्होंने कत्ल का वीडियो बनाकर जुर्म कबूला था, तब तक वे अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन नहीं करेंगे।
उदयपुर के इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला दिया था और अब इस पर हो रही राजनीति ने एक बार फिर प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है।
